
मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए साल 2026 बड़े बदलावों की सौगात लेकर आ रहा है, केंद्र सरकार द्वारा घोषित नया आयकर अधिनियम 2025 (New Income Tax Act 2025) आगामी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने जा रहा है, 64 साल पुराने टैक्स कानूनों को हटाकर लागू किए जा रहे इस नए कानून का सीधा असर आपकी बचत और निवेश पर पड़ेगा।
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12.75 लाख तक की कमाई अब ‘टैक्स-फ्री’
नए नियमों के तहत मिडिल क्लास को बड़ी राहत दी गई है, नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) चुनने वालों के लिए ₹12 लाख तक की आय पर ₹60,000 का टैक्स रिबेट (छूट) मिलेगा, इसके अलावा ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन को जोड़ने के बाद, अब प्रभावी रूप से ₹12.75 लाख तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
‘पैन कार्ड’ की अनिवार्यता में बड़ी ढील
आम आदमी को कागजी कार्रवाई से बचाने के लिए सरकार ने पैन (PAN) कार्ड की अनिवार्यता को कम किया है, अब ₹5 लाख तक की गाड़ी खरीदने, ₹20 लाख तक की प्रॉपर्टी डील या होटल में ₹1 लाख तक के बिल के लिए पैन नंबर देना जरूरी नहीं होगा।
विदेश यात्रा और पढ़ाई हुई सस्ती (TCS में कटौती)
विदेश जाने वालों और बाहर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए खुशखबरी है, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश पैसे भेजने पर लगने वाले TCS (Tax Collected at Source) को 5% और 20% की ऊँची दरों से घटाकर मात्र 2% कर दिया गया है।
शेयर बायबैक पर अब ‘कैपिटल गेन’ टैक्स
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए नियम बदल गए हैं, अब यदि कोई कंपनी अपने शेयर वापस खरीदती (Buyback) है, तो उस पर होने वाली आय को ‘डिविडेंड’ नहीं बल्कि ‘कैपिटल गेन्स’ माना जाएगा, इससे निवेशकों की टैक्स गणना का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।
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NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान
प्रॉपर्टी मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब NRI (प्रवासी भारतीय) से घर या जमीन खरीदते समय खरीदार को अलग से TAN नंबर लेने की झंझट नहीं पालनी होगी। खरीदार अपने सामान्य PAN कार्ड का उपयोग करके ही TDS काट सकेंगे।
डिजिटल करेंसी (e-Rupee) पर भी नजर
डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ ही सरकार ने नियमों को सख्त किया है, अब सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और क्रिप्टो एसेट्स में होने वाले लेनदेन की जानकारी भी टैक्स रिटर्न में देनी अनिवार्य होगी।
सरल हुआ कानून: 500 से घटकर 333 रह गईं धाराएं
कानूनी पेचीदगियों को खत्म करने के लिए पुराने कानून की 500 धाराओं को समेटकर अब केवल 333 धाराओं में बदल दिया गया है, इससे करदाताओं और टैक्स अधिकारियों के बीच विवाद कम होने की उम्मीद है।
















