
आज के दौर में लोन लेना आम बात हो गई है। होम लोन से लेकर पर्सनल लोन तक, हर कोई कर्ज के जरिए सपनों को साकार कर रहा है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी चुनौती है- समय पर ईएमआई (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट) चुकाना। अगर ईएमआई बाउंस हो गई, तो न सिर्फ 500-1200 रुपये तक का बाउंस चार्ज लग जाता है, बल्कि सिबिल स्कोर में 100-200 पॉइंट्स की गिरावट भी आ सकती है। नतीजा? नए लोन मिलना मुश्किल और ब्याज दरें बढ़ जाना। लेकिन चिंता न करें!
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ आसान फॉर्मूले अपनाकर आप इस खतरे से पूरी तरह बच सकते हैं। हमारी डीप रिसर्च में सामने आए ये टिप्स न केवल आर्थिक नुकसान रोकेंगे, बल्कि आपकी क्रेडिट हेल्थ को भी मजबूत बनाएंगे।
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EMI बाउंस के पीछे मुख्य कारण
ईएमआई बाउंस के पीछे मुख्य कारण हैं अपर्याप्त बैंक बैलेंस, गलत अकाउंट डिटेल्स या ECS मंडेट में त्रुटि। अक्सर सैलरी लेट आने से भी समस्या बढ़ जाती है। बजाज फिनसर्व जैसे संस्थानों के अनुसार, बाउंस पर लेट पेमेंट चार्ज भी जुड़ जाता है, जो कुल मिलाकर भारी पड़ता है। लेकिन अच्छी खबर ये है कि RBI गाइडलाइंस के तहत कई रास्ते खुले हैं। अगर बाउंस हो भी जाए, तो 24 घंटे के अंदर बैंक मैनेजर से बात करें। वे पेमेंट होल्ड या रीप्रेजेंटमेंट की सुविधा दे सकते हैं, जिससे सिबिल रिपोर्ट में नेगेटिव एंट्री नहीं जाती।
बचाव का सुपर फॉर्मूला
सबसे पहला कदम – ईएमआई को ऑटोमेट करें। मैन्युअली पेमेंट की बजाय स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन दें। इससे तय तारीख को राशि ऑटो डेबिट हो जाती है, बाउंस का खतरा शून्य। हमारी पिछली रिपोर्ट में भी यही सुझाव आया था। हर महीने ईएमआई से 2-3 दिन पहले अकाउंट चेक करें और पर्याप्त बैलेंस रखें। SMS/ऐप अलर्ट ऑन रखें ताकि कोई सरप्राइज न हो।
बजट प्लानिंग और इमरजेंसी फंड
दूसरा, बजट प्लानिंग को अपनाएं। लोन लेने से पहले ईएमआई कैलकुलेटर यूज करें। अपनी मासिक आय का 40-50% ही ईएमआई पर खर्च करें। अनावश्यक खर्चे जैसे डाइन-आउट, शॉपिंग काटें। इमरजेंसी फंड बनाएं – कम से कम 3-6 महीने का खर्च। अगर वित्तीय संकट आए, तो लोन कंपनी से बात करें। वे ईएमआई तारीख शिफ्ट या रिस्ट्रक्चरिंग की अनुमति दे सकते हैं। RBI के नियमों के तहत 2-3 मिस्ड ईएमआई पर मोरेटोरियम मिल सकता है, बिना ब्याज बढ़ाए।
स्मार्ट निवेश और मैन्युअल पेमेंट
तीसरा, स्मार्ट निवेश का सहारा लें। अगर म्यूचुअल फंड या FD में रिटर्न लोन ब्याज से ज्यादा हो, तो मासिक पेआउट चुनें। इस रिटर्न से ईएमआई का हिस्सा चुकाएं। UPI या नेट बैंकिंग से मैन्युअली पेमेंट भी ऑप्शन है, अगर ऑटो-डेबिट फेल हो जाए। PNB हाउसिंग जैसे बैंकों की रिपोर्ट बताती है कि ये तरीके बाउंस चार्ज से 100% बचाते हैं।
लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटजी
बार-बार बाउंस से क्रेडिट हिस्ट्री खराब होती है, जो 6 महीने तक असर डालती है। इसलिए बजट ऐप्स जैसे Money View या Walnut यूज करें। हर महीने ट्रैकिंग करें। अगर 2-3 ईएमआई मिस हो चुकी हों, तो लोन रिस्ट्रक्चरिंग अप्लाई करें – ये RBI अप्रूव्ड है और सिबिल पर असर नहीं डालता। विशेषज्ञ कहते हैं, “प्रिवेंटिव एक्शन ही बेस्ट सॉल्यूशन है।”
सफलता की मिसाल
उदाहरण के तौर पर, दिल्ली के रहने वाले राजेश ने ऑटो-डेबिट सेट किया और इमरजेंसी फंड बनाया। नतीजा? 2 साल से बाउंस-फ्री। आप भी ये फॉर्मूला अपनाएं। लाखों उधारकर्ता आज परेशान हैं, लेकिन ये टिप्स अपनाकर आप न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं, बल्कि फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल कर सकते हैं। आज ही एक्शन लें!
















