हिमाचल प्रदेश के लाखों राशन कार्ड धारकों को इस महीने सब्सिडी वाले आटे की मात्रा घटने से निराशा हाथ लगी है। गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों को पहले जहां प्रति कार्ड 14 किलो आटा मिलता था, वह अब घटकर 13 किलो रह गया है। यह बदलाव फरवरी माह के लिए अचानक लागू हो गया, जिससे आम जनता में असंतोष की लहर दौड़ पड़ी है। पहाड़ी राज्य में सड़कों की खराब स्थिति और मौसमी बाधाओं के चलते स्टॉक की कमी बताई जा रही है।

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कटौती का असर किस पर पड़ेगा
राज्य में कुल राशन कार्डों की संख्या करीब 19.5 लाख है, जिनमें से अधिकांश एपीएल श्रेणी के हैं। इन परिवारों में चार-पांच सदस्य आमतौर पर होते हैं, इसलिए एक किलो की कमी भी उनके मासिक खर्च को प्रभावित कर रही है। बाजार में आटे के दाम 40 रुपये किलो के आसपास हैं, जबकि राशन दुकानों पर यह काफी सस्ता मिलता है। चावल का कोटा 6 किलो यथावत है, लेकिन कुछ जगहों पर चने की दाल और सरसों तेल की उपलब्धता पर भी सवाल उठ रहे हैं। गरीब परिवारों को 35 किलो मुफ्त अनाज मिलता रहेगा, इसलिए असर मुख्य रूप से मध्यम वर्ग पर है।
सरकार ने क्या कहा है कारण?
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र से मिलने वाले कोटे में देरी और परिवहन की दिक्कतें इसकी वजह हैं। हमीरपुर जैसे जिलों में जिला नियंत्रक ने पुष्टि की कि यह व्यवस्था अस्थायी है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और भूस्खलन से ट्रकों का आवागमन प्रभावित होता रहता है। विपक्षी दलों ने इसे प्रबंधन की नाकामी करार दिया है। उनका कहना है कि किसानों से सीधी खरीद बढ़ाकर समस्या हल की जा सकती थी। सोशल मीडिया पर लोग अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं और जल्द बहाली की मांग कर रहे हैं।
जनता की प्रतिक्रिया और शिकायतें
राशन दुकानों पर पहुंचे लोग खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। एक महिला ने बताया कि घर का बजट पहले ही तनाव में है, अब यह कटौती और मुश्किल पैदा कर रही। युवा वर्ग बाजार के बढ़ते दामों का हवाला देकर कह रहे हैं कि सब्सिडी वाला राशन ही उनका सहारा है। कई जगह दुकानदारों ने भी बताया कि स्टॉक सीमित होने से वितरण में देरी हो रही। हेल्पलाइन नंबर पर शिकायतों की भरमार है। लोग विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपडेट तलाश रहे हैं।
आगे की राहत की उम्मीद
सरकार को उम्मीद है कि मार्च तक सामान्य आपूर्ति बहाल हो जाएगी। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पारदर्शिता बरती जाए। उपभोक्ताओं को सलाह है कि अपने नजदीकी डिपो पर जाकर कोटा चेक करें। अगर कोई अनियमितता दिखे तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। यह घटना सार्वजनिक वितरण व्यवस्था की कमजोर कड़ियों को सामने ला रही है। राज्य सरकार को लंबे समय के उपाय सोचने होंगे, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो। मध्यम वर्ग की मांग है कि कोटा पूरी तरह बहाल हो और सप्लाई चेन मजबूत बने। कुल मिलाकर, यह छोटा सा बदलाव लाखों घरों के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है।
















