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सरकारी नौकरी का क्रेज! भारत के किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा ‘सरकारी बाबू’? नंबर 1 राज्य का नाम जानकर नहीं होगा यकीन

देशभर में सरकारी जॉब का क्रेज क्यों? उत्तर प्रदेश टॉप पर, महाराष्ट्र-बिहार पीछे। नौकरी की सुरक्षा-पेंशन लुभाती है। युवा कोचिंग में जुटे, बेरोजगारी में ये बेस्ट ऑप्शन। आंकड़े चौंकाएंगे, पढ़ो पूरी सच्चाई!

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भारत में सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं का क्रेज कम होने का नाम नहीं ले रहा। नौकरी की सुरक्षा, पेंशन और सम्मान के कारण लाखों लोग हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं। आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश इस मामले में सबसे ऊपर है। यहां सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं, जो राज्य की विशाल आबादी और मजबूत प्रशासनिक ढांचे को दर्शाता है।

सरकारी नौकरी का क्रेज! भारत के किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा 'सरकारी बाबू'? नंबर 1 राज्य का नाम जानकर नहीं होगा यकीन

यह स्थिति कई कारणों से बनी है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, इसलिए सरकारी सेवाओं की मांग भी स्वाभाविक रूप से ज्यादा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और राजस्व जैसे विभागों में भारी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है। राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में लाखों नौकरियां प्रदान की हैं, जिससे यह आंकड़ा और मजबूत हुआ है। युवा वर्ग यहां सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देता है, क्योंकि निजी क्षेत्र में स्थिरता की कमी महसूस होती है।

प्रमुख राज्यों की स्थिति

उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र का स्थान आता है। यहां औद्योगिक विकास के बावजूद सरकारी नौकरियां लोकप्रिय हैं। पश्चिम बंगाल शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में मजबूत है, जबकि बिहार में निजी रोजगार के सीमित विकल्प सरकारी पदों को आकर्षक बनाते हैं। तमिलनाडु अपनी कुशल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है। इन राज्यों में कुल पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों की संख्या करोड़ों में है।

छोटे क्षेत्रों में स्थिति अलग है। दिल्ली, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी नौकरियों का प्रतिशत आबादी के हिसाब से सबसे ज्यादा है। यहां निजी क्षेत्र के अवसर कम होने से लोग सरकारी सेवाओं पर निर्भर रहते हैं। यह ट्रेंड पूरे देश में दिखता है, जहां ग्रामीण इलाकों में सरकारी नौकरी को परिवार का भरण-पोषण करने का सबसे सुरक्षित साधन माना जाता है।

क्रेज के पीछे की वजहें

सरकारी नौकरी का आकर्षण आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर है। महंगाई के दौर में निश्चित वेतन, भत्ते और रिटायरमेंट लाभ युवाओं को लुभाते हैं। निजी कंपनियों में छंटनी और अनुबंध आधारित नौकरियां असुरक्षा पैदा करती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कोचिंग संस्थानों का बाजार फल-फल रहा है। लाखों छात्र SSC, UPSC और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के लिए साल भर तैयारी करते हैं।

सरकारें भी सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश में हाल ही में पुलिस, शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में नई भर्तियों की योजना बनी है। इससे युवाओं में उत्साह बढ़ा है। इसी तरह अन्य राज्य भी समय-समय पर भर्ती अभियान चलाते हैं। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया में देरी और भ्रष्टाचार के आरोप चुनौतियां बने रहते हैं। फिर भी, पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।

चुनौतियां और रास्ता आगे

देश में बेरोजगारी की समस्या गंभीर है। सरकारी नौकरियां कुल रोजगार का छोटा हिस्सा हैं, इसलिए निजी क्षेत्र को मजबूत करने की जरूरत है। कौशल विकास योजनाएं युवाओं को विविध विकल्प दे सकती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अगर नई भर्तियों के साथ उद्योगों को बढ़ावा दें, तो संतुलन बनेगा।

सरकारी कर्मचारी देश की रीढ़ हैं। वे सेवाएं प्रदान करते हैं जो करोड़ों लोगों का जीवन चलाती हैं। उत्तर प्रदेश का दबदबा इसकी क्षमता दिखाता है। भविष्य में डिजिटल प्रशासन और नई तकनीक से यह और सशक्त होगा। युवाओं को सलाह है कि सरकारी नौकरी के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी अवसर तलाशें।

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info@nitap.in

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