
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं, इस युद्ध का सीधा असर आपकी रसोई से लेकर आपकी जेब तक पड़ने वाला है, भारत सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के आपातकालीन निर्देश भी जारी कर दिए हैं।
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पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (LPG)
- ईंधन की कीमतों में उछाल: भारत अपनी जरुरत का लगभग 80-85% कच्चा तेल आयात करता है, हॉर्मुज जलडमरुमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, में रुकावट आने से कच्चे तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं।
- एलपीजी सिलेंडर: भारत अपनी एलपीजी खपत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से मंगवाता है, सप्लाई चेन प्रभावित होने से घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका है।
खाने-पीने की वस्तुएं और राशन
- दालें: ‘ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन’ के मुताबिक, म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाली अरहर, उड़द और मसूर दालों का आयात समुद्री मार्ग बाधित होने से महंगा हो सकता है।
- खाद्य तेल और ड्राई फ्रूट्स: ईरान से आने वाले केसर, पिस्ता और अन्य ड्राई फ्रूट्स के साथ-साथ कुकिंग ऑयल की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है।
खेती और परिवहन लागत
- खेती पर मार: भारत भारी मात्रा में यूरिया का आयात करता है युद्ध के कारण उर्वरक (फर्टिलाइजर) महंगे होंगे, जिससे फसलों की लागत बढ़ेगी。
- माल ढुलाई: डीजल महंगा होने का सीधा असर ट्रकों और जहाजों के किराए पर पड़ेगा, जिससे बिस्कुट से लेकर साबुन तक हर रोजमर्रा की चीज महंगी हो सकती है।
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निवेश और अन्य क्षेत्र
- सोना और चांदी: अनिश्चितता के दौर में निवेशक सोने को सुरक्षित मानते हैं, शेयर बाजार गिरने पर सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आने की संभावना है।
- शेयर बाजार: विदेशी निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से भारी निकासी शुरू कर दी है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
- ऑटोमोबाइल: टाटा, महिंद्रा और मारुति जैसी कंपनियों की सप्लाई चेन और मिडिल ईस्ट को होने वाला एक्सपोर्ट प्रभावित होने से कारों की कीमतों और डिलीवरी पर असर पड़ सकता है।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
- बजट बिगड़ना: बढ़ती महंगाई से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा सकता है।
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹92 के स्तर तक गिर सकता है, जिससे विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी हो जाएगी।
















