मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने पाकिस्तान को बुरी तरह जकड़ लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराते खतरे के चलते पेट्रोल और डीजल के दामों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी गई। बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर सुबह से लंबी कतारें लगी हैं। लोग घंटों भटक रहे हैं, तो कई इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है।

रातोंरात हुए इस फैसले ने आम जनता को सदमे में डाल दिया। अब पेट्रोल की कीमत 320 से 335 रुपये के दायरे में पहुंच चुकी है, जबकि डीजल भी उसी स्तर पर। सरकारी अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन पुरानी महंगाई की यादें ताजा हो गईं। इस्लामाबाद से लेकर कराची तक गाड़ियां, स्कूटर और बोतलें लेकर लोग स्टेशन पर जमा हो गए। कई जगह सीमित मात्रा में ही ईंधन बांटा जा रहा है।
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मध्य पूर्वी तनाव
इस पूरे प्रकरण का मूल कारण क्षेत्रीय युद्ध है। ईरान पर बढ़ते हमलों से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें तेजी से चढ़ गईं। होर्मुज क्षेत्र, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, अब असुरक्षित हो गया। इससे शिपिंग खर्च आसमान छूने लगा। पाकिस्तान जैसे आयातक देश को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जो पहले से आर्थिक दबाव में था। ऊपर से सीमावर्ती इलाकों में अनौपचारिक ईंधन आपूर्ति ठप हो गई।
देश की कुल ईंधन जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेश से आता है। ऐसे में कीमतों का सीधा असर पंपों पर पड़ता है। पिछली बार भी इसी तरह के तनाव से छोटी-मोटी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन इस दफा आकड़ा चौंकाने वाला है। महंगाई की मार पहले ही जोरों पर थी, अब यह चेन रिएक्शन पूरे बाजार को हिला देगा।
सड़कों पर हाहाकार
जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक हैं। सुबह होते ही पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोग न सिर्फ वाहनों के लिए, बल्कि घरेलू उपयोग के लिए डिब्बे भरवा रहे हैं। कुछ स्थानों पर धक्कामुक्की और नोकझोंक की खबरें आ रही हैं। बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील प्रांतों में तो सात में से सात में से पांच पंप सूख चुके हैं। वहां स्थानीय परिवहन ठप होने की कगार पर है। अनियमित बाजार में ऊंचे दामों पर ईंधन मिलने की अफवाहें भी फैल रही हैं।
एक आम ड्राइवर के लिए यह मुसीबत बन गई। रोजाना 20 लीटर भरने का खर्च ही एक हजार रुपये से ज्यादा बढ़ गया। महीने भर में यह बोझ हजारों का हो जाएगा। खाने-पीने से लेकर बिजली उत्पादन तक हर चीज प्रभावित होगी। सोशल मीडिया पर लोग अपनी परेशानी साझा कर रहे हैं, वीडियो वायरल हो रहे हैं।
सरकार की कोशिशें
प्रधानमंत्री ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर हालात का जायजा लिया। सरकारी कार्यालयों को हफ्ते में चार दिन करने, गैर जरूरी यात्राओं पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। जमाखोरी रोकने के लिए सख्त निर्देश दिए गए। वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर काम तेज हो गया है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक युद्ध चले तो आयात बिल दोगुना हो सकता है।
आगे की चुनौतियां
पाकिस्तान की यह निर्भरता पुरानी समस्या को उजागर करती है। विदेशी ईंधन पर पूरी तरह आश्रित अर्थव्यवस्था को वैश्विक झटके सहना पड़ता है। सरकार के पास सब्सिडी देने की ताकत नहीं, इसलिए कीमतें सीधी जनता पर आ गिरती हैं। अगर तनाव बढ़ा तो महंगाई नई ऊंचाइयों को छू सकती है। फिलहाल सड़कों पर जंग जारी है। बूंद-बूंद ईंधन के लिए मशक्कत कर रहे लोग सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। क्या यह संकट जल्द थमेगा, समय बताएगा।
















