
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि केंद्र सरकार बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाने की योजना बना रही है, विशेष रुप से गृह मंत्री अमित शाह के फरवरी 2026 के तीन दिवसीय सीमांचल दौरे के बाद इन दावों ने और जोर पकड़ा हालांकि, अब केंद्र सरकार और आधिकारिक एजेंसियों ने इन खबरों पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
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क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि बिहार के चार जिलों (अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार) और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों (जैसे मालदा और उत्तर दिनाजपुर) को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा कुछ राजनीतिक नेताओं ने इसे “चिकन नेक” कॉरिडोर की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलावों से जोड़कर एक बड़ी सरकारी साजिश बताया था।
सरकार और PIB का स्पष्ट रुख: “पूरी तरह फेक”
- PIB फैक्ट चेक का खंडन: भारत सरकार की आधिकारिक एजेंसी PIB Fact Check ने आज (7 मार्च 2026) स्पष्ट रुप से इन दावों को “फेक” (झूठा) करार दिया है। एजेंसी ने साफ किया कि सरकार के पास ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
- गृह राज्य मंत्री का बयान: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शनिवार को इन अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिहार और बंगाल के जिलों को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की कोई योजना नहीं है और यह महज एक भ्रम है।
अमित शाह के दौरे की क्या थी असली वजह?
अमित शाह का 25 से 27 फरवरी 2026 तक का सीमांचल दौरा मुख्य रुप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर केंद्रित था:
- उन्होंने किशनगंज और पूर्णिया में उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी और नकली मुद्रा के नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
- शाह ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) की नई चौकियों का उद्घाटन किया और सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ की समीक्षा की।
- गृह मंत्री ने सीमावर्ती जिलों में कथित जनसांख्यिकीय बदलावों (Demographic shifts) को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के साथ गहन चर्चा की थी, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
बिहार और बंगाल को काटकर नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की खबरें निराधार हैं, सरकार का वर्तमान फोकस केवल सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और घुसपैठ रोकने पर है, जनता को सलाह दी गई है कि वे ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी सत्यापित करें।
















