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गाड़ी पर बंपर गार्ड लगवाया तो सीधे ₹5000 का चालान! सरकार क्यों दे रही है इसे गैर-कानूनी का दर्जा? जानें असली वजह

कार स्टाइल के चक्कर में लगवाया क्रैश गार्ड? ट्रैफिक पुलिस ने शुरू किया सख्त अभियान! एयरबैग फेल, पैदल यात्रियों पर मौत का साया... क्या आपकी गाड़ी भी खतरे में? जानें छिपे राज़, बचें भारी जुर्माने से!

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गाड़ियों को स्टाइलिश बनाने की होड़ में कई कार मालिक बंपर गार्ड या क्रैश गार्ड लगवा रहे हैं, लेकिन यह फैसला महंगा पड़ सकता है। ट्रैफिक पुलिस अब सख्ती से इन्हें हटा रही है और पकड़े जाने पर 5000 रुपये तक का चालान थमा रही है। सड़क सुरक्षा नियमों के तहत यह बदलाव कई साल पुराना है, फिर भी बड़े शहरों में चेकिंग तेज हो गई है। आखिर क्यों सरकार इसे इतना गंभीर अपराध मान रही है, जानते हैं विस्तार से।

गाड़ी पर बंपर गार्ड लगवाया तो सीधे ₹5000 का चालान! सरकार क्यों दे रही है इसे गैर-कानूनी का दर्जा? जानें असली वजह

सुरक्षा प्रणाली का नुकसान

आधुनिक वाहनों में बंपर के पीछे क्रंपल जोन होता है। यह हिस्सा दुर्घटना में टक्कर की पूरी ताकत सोख लेता है, ताकि ड्राइवर और यात्रियों तक असर न पहुंचे। एयरबैग भी इसी पर निर्भर करते हैं। भारी धातु का गार्ड लगाने से यह जोन बेकार हो जाता है। नतीजा यह कि छोटी टक्कर भी जानलेवा बन सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे चोटें दोगुनी हो जाती हैं। पैसेंजर कारों, चाहे SUV हों या सेडान, सभी पर यह नियम लागू है।

पैदल चलने वालों के लिए घातक

भारत की सड़कों पर पैदल यात्री और बाइक सवारों का खतरा सबसे ज्यादा है। सामान्य बंपर टक्कर लेते समय निचले हिस्से को नुकसान पहुंचाता है, ऊर्जा बंट जाती है। लेकिन ऊंचा मेटल गार्ड सीधे कमर या सिर पर प्रहार करता है। अध्ययनों से साबित है कि इससे मौत की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनता है। यही वजह है कि इसे सख्ती से रोका जा रहा है।

कानूनी सजा और प्रक्रिया

मोटर वाहन कानून की संबंधित धाराओं के तहत पहली बार 1000 रुपये से शुरू होकर दोबारा पकड़े जाने पर 10000 तक जुर्माना हो सकता है। ज्यादातर मामलों में 5000 रुपये ही वसूल होते हैं। ट्रैफिक पुलिस मौके पर गार्ड काट सकती है या वाहन जब्त कर सकती है। RTO से अनुमति के बिना कोई बदलाव अवैध है। पिछले कुछ हफ्तों में दिल्ली-मुंबई में सैकड़ों गाड़ियां पकड़ी गईं।

क्या हैं सुरक्षित विकल्प?

सभी गार्ड गैरकानूनी नहीं। फैक्ट्री लगे हल्के प्लास्टिक या रबर कवर पूरी तरह वैध हैं। ये वजन कम रखते हैं और सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। आफ्टरमार्केट वाले सस्ते मॉडल से बचें। हमेशा वाहन मैनुअल पढ़ें और अधिकृत सर्विस सेंटर से ही लगवाएं। मॉडिफिकेशन के लिए RTO नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जरूरी।

विशेषज्ञों की सलाह

ऑटो विशेषज्ञ जोर देकर कहते हैं कि स्टाइल से ज्यादा सुरक्षा पहले। पांच सितारा रेटिंग वाली गाड़ी का यह गार्ड स्तर गिरा देता है। ट्रैफिक विभाग ने अभियान चलाया है, चेकिंग बढ़ेगी। अगर आपकी गाड़ी पर लगा है तो तुरंत हटवाएं। सुरक्षित सड़कें सबकी जिम्मेदारी हैं। स्मार्ट ड्राइवर बनें, चालान से बचें।

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info@nitap.in

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