सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहण ने खगोल प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है। 2 अगस्त 2027 को होने वाला यह ग्रहण करीब 6 मिनट 22 सेकंड तक चलेगा। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में घना अंधेरा छा जाएगा, जैसे दिन अचानक रात हो।

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ग्रहण का वैज्ञानिक रहस्य
यह ग्रहण इतना लंबा क्यों होगा। उस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होगा, जबकि पृथ्वी सूर्य से सबसे दूर। इससे चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा। पूर्ण ग्रहण के समय तापमान 5 से 10 डिग्री गिर सकता है। हवा की दिशा बदल जाएगी और सूर्य की बाहरी चमकीली परत कोरोना नग्न आंखों से दिखाई देगी। वैज्ञानिक इस मौके पर सूर्य की गतिविधियों और सौर हवाओं का अध्ययन करेंगे। अगला ऐसा नजारा 2114 तक नहीं आएगा।
वैश्विक दृश्यमानता का नक्शा
यह आश्चर्यजनक घटना मुख्य रूप से उत्तरी अफ्रीका के देशों जैसे मिस्र, मोरक्को, लीबिया में पूरी तरह दिखेगी। दक्षिणी यूरोप का स्पेन भी इसकी चपेट में होगा। अटलांटिक महासागर के ऊपर से गुजरने वाली इस ग्रहण की पट्टी हजारों किलोमीटर लंबी होगी। इन क्षेत्रों में लोग रात के सन्नाटे का अनुभव करेंगे, जबकि पक्षी शाम समझकर लौट आएंगे।
भारत में क्या होगा दृश्य
भारतवासियों के लिए अच्छी खबर यह कि पूरा देश आंशिक ग्रहण का साक्षी बनेगा। दोपहर 3:34 बजे से शाम 5:53 बजे तक सूर्य का कुछ हिस्सा ढक जाएगा। पूर्वोत्तर राज्य जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश में प्रभाव अधिक स्पष्ट रहेगा। मैदानी इलाकों में भी सूर्य का आंशिक आवरण नजर आएगा। हालांकि पूर्ण अंधेरा यहां नहीं छाएगा। पूर्ण ग्रहण का मजा लेने के इच्छुक लोग अफ्रीका या स्पेन की सैर करें।
धार्मिक और सावधानी भरे पहलू
हिंदू परंपरा में सूर्य ग्रहण को राहु-केतु का प्रभाव माना जाता है। सूतक काल में पूजा-पाठ और भोजन से परहेज की सलाह दी जाती है। आंशिक होने से भारत में सूतक की सख्ती कम हो सकती है। लेकिन सावधानी बरतें। ग्रहण कभी नंगी आंखों से न देखें। विशेष आईएसओ मानक चश्मे या ग्रहण ग्लास ही इस्तेमाल करें, वरना आंखें खराब हो सकती हैं।
तैयारियां और उत्साह
नासा और इसरो जैसी संस्थाएं लाइव प्रसारण की योजना बना रही हैं। पर्यटन कंपनियां ग्रहण टूर पैकेज ला रही हैं। यह घटना विज्ञान और संस्कृति का अनोखा संगम बनेगी। खगोल प्रेमी अभी से कैलेंडर चेक करें। इतिहास रचने वाला यह पल हाथ से न निकले।
















