महंगाई की मार झेल रहे आम लोग अब पेट्रोल पंपों पर होने वाली ठगी से तंग आ चुके हैं। कई जगहों पर मीटरों में हेरफेर कर कम ईंधन देकर ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं, तो कहीं घटिया क्वालिटी का तेल बेचा जाता है जो वाहनों को खराब कर देता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब सरकारी तंत्र ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। एक साधारण शिकायत दर्ज करने मात्र से पंप मालिकों पर तुरंत कार्रवाई हो रही है। आइए जानते हैं कैसे खुद को बचाएं और धोखेबाजों को सबक सिखाएं।

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क्यों बढ़ रही हैं शिकायतें?
पिछले कुछ सालों में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं, ऐसे में हर ग्राहक सतर्क हो गया है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जहां ट्रैफिक जाम आम बात है, वहां पेट्रोल पंपों पर रोजमर्रा की निर्भरता ज्यादा है। कई पंपों पर कर्मचारी मीटर रोक देते हैं या पानी मिला तेल भर देते हैं। इससे न सिर्फ जेब ढीली होती है बल्कि इंजन की सेहत भी बिगड़ती है। ग्राहक अब मोबाइल से वीडियो बनाकर सबूत जमा कर रहे हैं, जो जांच में कारगर साबित हो रहे हैं।
शिकायत दर्ज करने के आसान रास्ते
सबसे पहले पंप पर लगे शिकायत बॉक्स में लिखें या रजिस्टर में एंट्री कराएं। अगर तुरंत एक्शन चाहिए तो सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें, जहां 24 से 48 घंटे में जवाब मिल जाता है। पंप का नाम, लोकेशन, समय और राशि का जिक्र जरूर करें। वीडियो या फोटो जोड़ना न भूलें। तेल कंपनियों के टोल फ्री नंबर्स भी कमाल के हैं। इंडियन ऑयल या एचपी के लिए एक खास नंबर डायल करें, रिलायंस के लिए दूसरा। कॉल पर पूरा विवरण दें, शिकायत आईडी नोट करें और इंतजार करें।
कार्रवाई कैसे होती है?
शिकायत मिलते ही स्थानीय वजन तौल विभाग या कंपनी की टीम现场 पहुंच जाती है। मीटर की जांच, ईंधन सैंपल टेस्ट और रिकॉर्ड चेकिंग होती है। दोष साबित होने पर लाइसेंस निलंबित कर दिया जाता है, भारी जुर्माना ठोंका जाता है। कई मामलों में पंप मालिक जेल की हवा खा चुके हैं। यह व्यवस्था ग्राहकों को मजबूत बना रही है।
आपकी सुरक्षा के उपाय
ईंधन भराते वक्त सत्यापित मीटर चुनें, रसीद लें और प्रक्रिया का वीडियो बनाएं। छोटी सी सतर्कता से बड़ा फायदा। मेरठ जैसे शहरों में स्थानीय लोग इस हथियार से पंपों को सुधारने में जुटे हैं। अब धोखा बर्दाश्त करने की बारी नहीं, एक कदम उठाएं और न्याय पाएं। साफ ईंधन का हक सबका है!
















