पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव राष्ट्रपति शासन के साये में होंगे। राज्य का मौजूदा कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है, लेकिन कानून व्यवस्था को लेकर छिड़ी जंग और मतदाता सूची पर विवाद ने पूरे माहौल को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती दी है, वहीं विपक्ष राष्ट्रपति शासन की मांग को जोर-शोर से उठा रहा है।

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मतदाता सूची पर छिड़ा महायुद्ध
हाल के महीनों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत लाखों नाम कटने की खबरें सामने आई हैं। ममता बनर्जी का आरोप है कि यह सब विपक्षी दलों के इशारे पर हो रहा है, जिससे लाखों वोटर वंचित हो जाएंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर सुनवाई तेज कर दी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी वैध वोटर मतदान से महरूम नहीं रहेगा। सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
ममता की ललकार और विपक्ष का पलटवार
ममता बनर्जी ने केंद्र पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई का इल्जाम लगाया है। प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी और राज्यपाल से विवाद को वे राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश बता रही हैं। उन्होंने पुरानी शैली में कहा कि अगर केंद्र को हिम्मत है तो राष्ट्रपति शासन लगा दे। उधर, बीजेपी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने उल्टा मांग रखी है। उनका कहना है कि राज्य में खराब कानून व्यवस्था के कारण ही चुनाव राष्ट्रपति शासन के तहत ही कराना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि देरी होने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।
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चुनाव आयोग की सख्ती और तैयारियां
चुनाव आयोग ने हाल ही में कोलकाता का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित किया जाएगा। मतदाता नोटिस तत्काल भेजने के निर्देश जारी हुए हैं। आयोग का मानना है कि विवादों के बावजूद प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी। राज्य में कम चरणों में मतदान की योजना भी बन रही है ताकि प्रक्रिया तेज हो।
भविष्य की तस्वीर
विश्लेषक मानते हैं कि राष्ट्रपति शासन लगाना आसान नहीं। इसके लिए केंद्र और राज्यपाल की सिफारिश जरूरी है, जो फिलहाल दिखाई नहीं दे रही। सियासी दलों के बीच तनातनी चरम पर है, लेकिन चुनाव आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि सामान्य तरीके से ही वोटिंग होगी। ममता बनर्जी की सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष के बीच यह जंग 2026 के चुनाव को और रोचक बना रही है। राज्य की जनता अब इंतजार कर रही है कि आखिरकार क्या होता है।
















