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घर की नींव में मिला 500 साल पुराना सोने का खजाना! परिवार और सरकार के बीच छिड़ी जंग; जानें अब किसका होगा सोना

कर्नाटक के लक्कुंडी में घर की नींव खोदते प्रज्वल को 500 साल पुराना सोने का खजाना मिला। ईमानदारी से सरकार को सौंपा, लेकिन हिस्से की मांग पर विवाद। गरीब परिवार की उम्मीदें टिकी हैं।

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कर्नाटक के गदग जिले में बसा लक्कुंडी गांव अपनी प्राचीन विरासत के लिए जाना जाता है। यहां हाल ही में एक साधारण परिवार को घर की नींव खोदने के दौरान अपार धन मिला। यह खजाना करीब 500 से 600 साल पुराना बताया जा रहा है। चालुक्य और विजयनगर काल की यह निशानी अब विवाद का केंद्र बनी हुई है।

घर की नींव में मिला 500 साल पुराना सोने का खजाना! परिवार और सरकार के बीच छिड़ी जंग; जानें अब किसका होगा सोना

खोज की अनोखी कहानी

जनवरी 2026 की एक सामान्य सुबह प्रज्वल रिट्टी अपने नए घर की नींव मजबूत करा रहे थे। खुदाई के दौरान मजदूरों को मिट्टी में कुछ चमकदार चीजें नजर आईं। निकटता से देखने पर पता चला कि यह एक पुराना मटका है जिसमें सोने के कीमती आभूषण भरे हैं। कुल 22 टुकड़ों में हार, झुमके, अंगूठियां और मंगलसूत्र शामिल हैं। इनका वजन 466 ग्राम है। परिवार ने बिना देर किए स्थानीय अधिकारियों को सूचना दे दी। प्रज्वल की ईमानदारी ने पूरे इलाके में चर्चा पैदा कर दी।

खजाने का ऐतिहासिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि ये आभूषण 15वीं-16वीं शताब्दी के हैं। लक्कुंडी जैसे स्थल उस दौर के व्यापार और समृद्धि के गवाह रहे हैं। सामान्य सोने के भाव पर इनकी कीमत लाखों में है, लेकिन पुरातात्विक मूल्य इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। करोड़ों की इस धरोहर से गांव का इतिहास नई रोशनी में उभर सकता है। पुरातत्व विभाग ने इसे संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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परिवार और अधिकारियों के बीच टकराव

रिट्टी परिवार गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहा था। प्रज्वल की विधवा मां और दादी इस खजाने से जीवन बदलने की उम्मीद लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि उन्होंने सब कुछ सरकार को सौंप दिया, इसलिए उचित हिस्सा मिलना चाहिए। वहीं कानून के अनुसार प्राचीन खजाने राज्य संपत्ति होते हैं। खोजने वाले को पुरस्कार या हिस्सा मिल सकता है, लेकिन फैसला जटिल प्रक्रिया से गुजरता है। परिवार जमीन या आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है।

कानूनी प्रावधान और भविष्य

देश में खजाना अधिनियम के तहत ऐसी खोजों का सख्त नियम है। 100 साल से पुरानी वस्तुएं सरकारी हिफाजत में जाती हैं। ईमानदार खोजी को सम्मानित किया जाता है, फिर भी कई मामले कोर्ट तक पहुंच जाते हैं। लक्कुंडी की यह घटना कानून की प्रासंगिकता पर बहस छेड़ रही है। क्या गरीब परिवार को न्याय मिलेगा या यह धरोहर संग्रहालयों तक सीमित रहेगी। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही स्पष्ट निर्णय आएगा। यह किस्सा इतिहास और वर्तमान की अनोखी मिसाल बन चुका है।

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info@nitap.in

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