
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी 8.25% की ब्याज दर को बरकरार रखने का बड़ा फैसला लिया है, यह लगातार दूसरा साल है जब ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, हालांकि, पीएफ पर ब्याज की गणना को लेकर अक्सर कर्मचारी असमंजस में रहते हैं, आइए समझते हैं वह सटीक फॉर्मूला जिससे आप खुद जान सकते हैं कि आपके खाते में कितनी राशि बढ़ी है।
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ब्याज गणना का ‘मासिक’ फॉर्मूला
भले ही सरकार वार्षिक ब्याज दर (8.25%) घोषित करती है, लेकिन EPFO इसे आपके खाते में ‘मासिक रनिंग बैलेंस’ के आधार पर जोड़ता है।
- मासिक ब्याज दर:
प्रति माह。
- नियम: हर महीने के अंत में जो बैलेंस बचता है, उस पर यह ब्याज लागू होता है, लेकिन यह पैसा साल के अंत में एक साथ क्रेडिट किया जाता है।
योगदान का गणित: कहां जाता है आपका पैसा?
आपके वेतन (Basic + DA) से कटने वाला 12% हिस्सा सीधे आपके EPF खाते में जाता है। नियोक्ता (कंपनी) के 12% योगदान का विभाजन इस प्रकार होता है:
- 3.67%: आपके EPF खाते में (इसी पर ब्याज मिलता है)
- 8.33%: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में (इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता)
एक उदाहरण से समझें (₹2 लाख के बैलेंस पर)
यदि आपके पीएफ खाते में ₹2 लाख का ओपनिंग बैलेंस है और हर महीने कर्मचारी+नियोक्ता का कुल ₹5,000 योगदान जमा होता है:
- अप्रैल का ब्याज:
।
- मई का ब्याज: पिछले बैलेंस में नया योगदान जोड़कर फिर से 0.6875% निकाला जाएगा।
- सालाना क्रेडिट: इसी तरह 12 महीनों का ब्याज जोड़कर 31 मार्च को खाते में दिखाया जाएगा।
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खाते में कब आएगा पैसा?
CBT की बैठक में सिफारिश के बाद अब इसे वित्त मंत्रालय की अंतिम मंजूरी का इंतजार है, उम्मीद है कि मई से जून 2026 के बीच करोड़ों अंशधारकों के खातों में ब्याज की राशि आनी शुरू हो जाएगी।
अपना बैलेंस चेक करने के आसान तरीके
- EPFO Passbook Portal पर लॉगिन करें।
- मिस्ड कॉल: 996604425 पर पंजीकृत नंबर से कॉल करें।
- SMS: ‘EPFOHO UAN HIN’ लिखकर 7738299899 पर भेजें।
















