
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच, इजरायल द्वारा यरुशलेम स्थित पवित्र अल-अक्सा मस्जिद के द्वार बंद किए जाने के फैसले ने मुस्लिम जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, सऊदी अरब और पाकिस्तान सहित 8 प्रमुख मुस्लिम देशों ने इजरायल के इस कदम के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है।
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रमजान में इबादत पर पाबंदी से बढ़ा तनाव
मार्च 2026 में रमजान का पवित्र महीना शुरू होते ही इजरायली अधिकारियों ने “सुरक्षा कारणों” का हवाला देते हुए मस्जिद परिसर को श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया है। इस फैसले के बाद हजारों मुस्लिम श्रद्धालु तरावीह और जुमे की नमाज अदा करने से वंचित रह गए हैं, गौरतलब है कि फरवरी के अंत से ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध के कारण क्षेत्र में पहले ही अस्थिरता बनी हुई है।
इन 8 देशों ने दी सीधी चेतावनी
बुधवार, 11 मार्च को सऊदी अरब, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की, मिस्र, जॉर्डन, इंडोनेशिया और कतर ने एक साझा बयान जारी कर इजरायल की कड़ी निंदा की। इन देशों का कहना है कि:
- मस्जिद की तालाबंदी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।
- इजरायल को यरूशलेम के पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक यथास्थिति (Status Quo) का सम्मान करना चाहिए।
- मस्जिद के द्वार तुरंत न खोले जाने पर स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है।
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इजरायल का रुख और युद्ध की स्थिति
दूसरी ओर, इजरायल का दावा है कि ईरान के साथ चल रहे मिसाइल युद्ध और संभावित हवाई हमलों के खतरे को देखते हुए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों को बंद करना अनिवार्य है, हालांकि, मुस्लिम देशों का तर्क है कि यह सुरक्षा के नाम पर धार्मिक अधिकारों का हनन है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी सीधे सैन्य संघर्ष और अब अल-अक्सा विवाद ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय शांति बहाली की अपील कर रहा है, लेकिन तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।
















