उत्तर प्रदेश में पढ़ने वाली मेधावी छात्राओं के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार ने एक नई योजना शुरू की है, जिसमें पहले चरण में 45,000 टॉप करने वाली छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जाएगी। यह कदम उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया है।

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योजना की पूरी जानकारी!
यह योजना मुख्य रूप से डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाली स्नातक दूसरी वर्ष की छात्राओं पर केंद्रित है। राज्य भर में स्नातक पहले वर्ष में करीब नौ लाख छात्राएं सक्रिय हैं। इनमें से शीर्ष पांच प्रतिशत मेधावी लड़कियों का चयन होगा। कुल मिलाकर 45,000 स्कूटी वितरित होने से छात्राओं को कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी। स्कूटी के साथ हेलमेट और ईंधन की व्यवस्था भी संभव है, जो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
चयन प्रक्रिया की खासियत
चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। हर कोर्स में अलग-अलग टॉपर्स चुने जाएंगे। उदाहरण के लिए, कला, विज्ञान या वाणिज्य जैसे पारंपरिक कोर्स और बीबीए, बीटेक जैसे पेशेवर पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या के हिसाब से लाभ मिलेगा। केवल पहले वर्ष में शानदार अंक लाने वाली और दूसरे वर्ष में पहुंची छात्राएं ही पात्र होंगी। विभाग जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
बजट और समयसीमा
इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकारी खजाने से 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि चरणबद्ध तरीके से खर्च होगी। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इसकी शुरुआत हुई थी। अब नियम बन चुके हैं और वितरण प्रक्रिया मार्च के अंत तक शुरू हो सकती है। ग्रामीण जिलों में यह योजना ड्रॉपआउट दर को कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।
प्रभाव और अपेक्षाएं
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बेटियों की उच्च शिक्षा में रुचि जगाएगा। जहां बस या अन्य साधनों की कमी से कई लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं, वहां स्कूटी स्वावलंबन का प्रतीक बनेगी। पहले स्कूल स्तर पर साइकिल वितरण सफल रहा था, अब कॉलेज स्तर पर यह नया प्रयोग है। छात्राएं उत्साहित हैं और अपनी यूनिवर्सिटी की मेरिट सूची देखने का इंतजार कर रही हैं।
यह योजना न केवल शिक्षा को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार साबित होगी। राज्य सरकार की यह पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को नई ऊंचाई देगी।
















