
दिल्ली की बसों में मुफ्त सफर करने वाली महिलाओं के लिए एक बड़ी खबर है, दिल्ली सरकार और DTC (दिल्ली परिवहन निगम) ने पिंक टिकट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है, अब महिलाओं को मुफ्त यात्रा के लिए कागजी ‘पिंक टिकट’ के बजाय ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ का इस्तेमाल करना होगा।
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क्यों बदला जा रहा है नियम?
सरकार का लक्ष्य पिंक टिकट की कालाबाजारी और दुरुपयोग को रोकना है, नए डिजिटल कार्ड के आने से मुफ्त यात्रा करने वाली महिलाओं का सटीक डेटा मिल सकेगा और टिकटों की छपाई पर होने वाला खर्च भी बचेगा।
क्या है नया ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’?
यह एक कॉन्टैक्टलेस स्मार्ट कार्ड है जो ‘नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड’ (NCMC) तकनीक पर आधारित है।
- टैप एंड गो: अब कंडक्टर से टिकट मांगने के बजाय महिलाओं को बस में चढ़ते या उतरते समय मशीन पर कार्ड टैप करना होगा।
- स्थानीय पहचान अनिवार्य: यह सुविधा अब केवल दिल्ली की निवासी महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए होगी। कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली के पते वाला आधार कार्ड अनिवार्य है।
- जुर्माने का प्रावधान: एक तय समय सीमा के बाद, बिना कार्ड के मुफ्त सफर करने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
3 महीने की राहत: अभी नहीं बंद हुए पुराने टिकट
घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार ने बदलाव के लिए ट्रांजिशन पीरियड दिया है, अगले 3 महीनों तक (संभावित जून 2026 तक) पुराने कागजी पिंक टिकट भी मान्य रहेंगे। इस दौरान महिलाएं अपना नया कार्ड बनवा सकती हैं।
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कार्ड कहाँ और कैसे बनेगा?
पहला ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ पूरी तरह मुफ्त बनाया जा रहा है इसके लिए दिल्ली में 50 से अधिक केंद्र स्थापित किए गए हैं:
- सभी SDM और DM कार्यालय।
- प्रमुख DTC डिपो (जैसे कश्मीरी गेट, नेहरू प्लेस, और रोहिणी)।
- डीयू (DU) और जेएनयू (JNU) जैसे विश्वविद्यालय परिसर।
अगर आपका कार्ड खो जाता है, तो उसे दोबारा बनवाने के लिए आपको 59 रुपये का शुल्क देना होगा यह कार्ड मेट्रो में भी काम करेगा, लेकिन मुफ्त सफर का लाभ सिर्फ बसों में ही मिलेगा।
















