केंद्र सरकार की पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत 22वीं किस्त जारी होने के बावजूद लाखों किसानों के खातों में अभी तक दो हजार रुपये नहीं पहुंचे हैं। 13 मार्च को शुरू हुए इस वितरण में करीब 9.32 करोड़ लाभार्थियों को कुल 18,000 करोड़ रुपये देने का लक्ष्य था। लेकिन कई किसान परेशान हैं क्योंकि तकनीकी खामियां और दस्तावेजी कमियां इस प्रक्रिया में बाधा बन रही हैं। ग्रामीण इलाकों में यह देरी फसलों की बुआई और घरेलू खर्चों पर असर डाल रही है।

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देरी के प्रमुख कारण
इस किस्त में देरी का मुख्य कारण e-KYC पूरा न होना, आधार और बैंक खाते का लिंक न होना तथा भूमि रिकॉर्ड की सीडिंग में कमी है। कई मामलों में बैंक खाते का विवरण गलत दर्ज होने या लाभार्थी सूची से नाम हट जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है। एक स्थानीय किसान ने बताया कि उनका स्टेटस चेक करने पर सब कुछ सही दिख रहा है, लेकिन पैसा अब तक नहीं आया। ऐसे में किसान भटक रहे हैं और स्थानीय बैंक शाखाओं पर भीड़ लग रही है।
स्टेटस कैसे जांचें?
किसानों को सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस जांचना चाहिए। आधार नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालकर आसानी से पता चल जाता है कि किस्त जारी हुई है या नहीं। रजिस्टर्ड मोबाइल पर आने वाले संदेश या बैंक अलर्ट भी उपयोगी होते हैं। अगर समस्या बनी रहती है तो e-KYC तुरंत पूरा करें, जो मोबाइल पर ही OTP से हो जाता है। भूमि रिकॉर्ड राज्य स्तर के पोर्टलों से अपडेट करवाएं। ये कदम उठाने से ज्यादातर मामले सुलझ जाते हैं।
हेल्पलाइन से मिलेगी तत्काल मदद
परेशानी होने पर टोल-फ्री नंबर 155261 या 011-24300606 पर कॉल करें। ये सेवाएं सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहती हैं। अन्य नंबर जैसे 18001801551 और 011-24300661 भी काम आ सकते हैं। ईमेल के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि फोन पर ही डेटा सुधार कर पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है। हाल के दिनों में हजारों शिकायतें निपट चुकी हैं, जिससे किसानों को राहत मिली है।
आगे की राहत और सुझाव
सरकार ने अप्रैल तक सभी लंबित किस्तें क्लियर करने का वादा किया है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे डीबीटी नियमों का सख्ती से पालन करें और समय पर दस्तावेज अपडेट रखें। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएससी केंद्रों पर जागरूकता कैंप लगाने की जरूरत है ताकि डिजिटल खाई कम हो। यह घटना दिखाती है कि डिजिटल युग में जागरूकता और तकनीकी पहुंच कितनी महत्वपूर्ण है। किसान भाइयों को धैर्य रखते हुए इन चैनलों का उपयोग करना चाहिए।
















