
मोदी सरकार ने देश के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना ‘भव्य’ (BHAVYA – Bharat Audyogik Vikas Yojana) को मंजूरी दी है, 18 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई।
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क्या है ‘भव्य’ योजना का मुख्य लक्ष्य?
इस योजना का पूरा नाम ‘भारत औद्योगिक विकास योजना’ है, इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत को दुनिया का ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाना और घरेलू उत्पादन को अभूतपूर्व गति देना है, सरकार का लक्ष्य ‘इंटेंट टू प्रोडक्शन’ (सोच से उत्पादन तक) के समय को न्यूनतम करना है।
बजट और पैमाना
- कुल आवंटन: केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए ₹33,660 करोड़ का विशाल बजट निर्धारित किया है।
- 100 इंडस्ट्रियल पार्क: योजना के तहत देशभर में 100 अत्याधुनिक ‘प्लग-एंड-प्ले’ (Plug-and-Play) इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे।
- समय सीमा: यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक लागू रहेगी।
‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल की खासियत
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘प्लग-एंड-प्ले’ मॉडल है। इसका मतलब है कि उद्यमियों को जमीन खरीदने, बिजली-पानी का कनेक्शन लेने या बुनियादी ढांचा तैयार करने में समय बर्बाद नहीं करना होगा।
- रेडी-टू-यूज़ इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकार फैक्ट्रियों के लिए तैयार शेड, सड़क, बिजली, पानी और वेस्ट मैनेजमेंट की सुविधा पहले से उपलब्ध कराएगी।
- वित्तीय सहायता: इन पार्कों को विकसित करने के लिए सरकार प्रति एकड़ ₹1 करोड़ तक की वित्तीय मदद देगी।
रोजगार और आर्थिक प्रभाव
- 15 लाख नौकरियां: अनुमान है कि इन 100 पार्कों के माध्यम से देश में लगभग 15 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- MSME को संजीवनी: यह योजना छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए गेम-चेंजर साबित होगी, क्योंकि उन्हें भारी शुरुआती निवेश की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- गतिशक्ति से जुड़ाव: इन पार्कों को ‘पीएम गतिशक्ति’ नेशनल मास्टर प्लान से जोड़ा जाएगा ताकि लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और माल की आवाजाही तेज हो सके।
‘विकसित भारत’ की ओर कदम
‘भव्य’ योजना को ‘मेक इन इंडिया’ 2.0 के रूप में देखा जा रहा है, यह न केवल विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करेगी, बल्कि स्थानीय निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद करेगी।
















