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B.Ed पर भारी पड़ रहा D.El.Ed; जानें क्यों प्राइमरी स्कूल टीचर बनने के लिए मची है इसमें होड़?

प्राइमरी टीचर बनने की होड़ में D.El.Ed ने B.Ed को पछाड़ दिया। 2 साल का सस्ता कोर्स, सुप्रीम कोर्ट नियम और NEP ने इसे पसंदीदा बनाया। लाखों वैकेंसी, जल्दी नौकरी के लिए युवा इसकी राह पकड़ रहे हैं।

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सरकारी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्तियों के लिए युवाओं का रुझान अब डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (D.El.Ed) की ओर तेजी से बढ़ रहा है। एक समय था जब बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed) को शिक्षण क्षेत्र का सबसे मजबूत विकल्प माना जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। समय की कमी, कम लागत और सरकारी नियमों ने D.El.Ed को प्राइमरी टीचिंग का नया चेहरा बना दिया है। लाखों छात्र इस कोर्स के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा चरम पर पहुंच गई है।

B.Ed पर भारी पड़ रहा D.El.Ed; जानें क्यों प्राइमरी स्कूल टीचर बनने के लिए मची है इसमें होड़?

समय और खर्च में बड़ा फर्क

D.El.Ed कोर्स बारहवीं पास छात्र सिर्फ दो साल में पूरा कर लेते हैं। इससे नौकरी की राह तेज हो जाती है। दूसरी ओर B.Ed के लिए पहले स्नातक डिग्री जरूरी होती है, जो कुल मिलाकर तीन से चार साल ले लेती है। फीस की बात करें तो D.El.Ed सालाना बीस से पचास हजार रुपये में हो जाता है। B.Ed संस्थानों में यह आंकड़ा पचास हजार से एक लाख तक पहुंच जाता है। ऐसे में नौजवान जल्दी कमाई शुरू करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्राइमरी स्तर पर नौकरी पाने वाले छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

नियमों ने तय की प्राथमिकता

सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले ने प्राइमरी टीचिंग (कक्षा एक से पांच) के लिए B.Ed धारकों का रास्ता बंद कर दिया। अब केवल D.El.Ed वालों को ही केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के पहले पेपर से प्रवेश मिलता है। राज्य स्तर पर भी उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों में भर्तियां इसी पैटर्न पर चल रही हैं। नई शिक्षा नीति ने प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दिया है। छोटे बच्चों के लिए खेल आधारित सीखने की पद्धति पर फोकस है, जो D.El.Ed का मूल मंत्र है।

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नौकरी के मौके और कमाई

समग्र शिक्षा अभियान के तहत हर साल हजारों वैकेंसी निकल रही हैं। प्राइमरी स्कूलों में पदों की संख्या बीस हजार से लेकर अस्सी हजार तक हो सकती है। D.El.Ed पास उम्मीदवारों को शुरुआती वेतन बारह से बीस हजार रुपये मिलता है। सरकारी नौकरी में पेंशन और प्रमोशन के अतिरिक्त लाभ भी जुड़ते हैं। B.Ed उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा छह से बारह) के लिए बेहतर है, जहां तनख्वाह पच्चीस हजार से ऊपर होती है। लेकिन प्राइमरी में प्रवेश न मिलने से B.Ed वाले इंतजार कर रहे हैं।

भविष्य की राह आसान

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि D.El.Ed से शुरुआत करें और बाद में B.Ed जोड़ लें। इससे करियर मजबूत होता है। अगले पांच सालों में दस लाख से ज्यादा प्राइमरी शिक्षकों की जरूरत बताई जा रही है। आगरा, लखनऊ जैसे शहरों में कोचिंग सेंटर D.El.Ed बैचों से लबालब हैं। छात्रों का कहना है कि तुरंत नौकरी का मौका क्यों छोड़ें। कुल मिलाकर प्राइमरी शिक्षा का भविष्य D.El.Ed के कंधों पर टिका है। अभ्यर्थी CTET पर ध्यान दें और योग्यता की पुष्टि करें।

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info@nitap.in

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