Join Contact

LPG Crisis: अब 14 किलो की जगह मिलेगा सिर्फ 10 किलो का गैस सिलेंडर? सरकार लेने जा रही ये फैसला

भारत में LPG की कमी के बीच 14 किलो वाले सिलेंडर की जगह 10 किलो वजन वाले छोटे सिलेंडर देने की योजना पर विचार चल रहा है, ताकि उपलब्ध गैस अधिक घरों तक पहुंच सके और महंगाई व दुरुपयोग पर रोक लगे।

Published On:

भारत में घरेलू गैस यानी LPG की आपूर्ति पर अब नए संकेत दिख रहे हैं। राजधानी और राज्यों के स्तर पर चर्चा तेज है कि आने वाले समय में घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर की जगह कम वजन के सिलेंडर दिए जा सकते हैं। इस बातचीत के पीछे LPG की बढ़ती महंगाई और वैश्विक स्तर पर तेल-गैस की आपूर्ति में आई देरी जैसे कारण सामने आ रहे हैं।

LPG Crisis: अब 14 किलो की जगह मिलेगा सिर्फ 10 किलो का गैस सिलेंडर? सरकार लेने जा रही ये फैसला

वैश्विक मंडी का असर भारतीय रसोई पर

भारत में घरेलू रसोईघरों में इस्तेमाल होने वाली LPG की बड़ी हिस्सेदारी विदेशों से आयात पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट के हिस्से विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाली जहाजरानी पर आए तनाव ने डिलीवरी लाइन में विलंब पैदा कर दिया है। इसके चलते कई जहाजों के समय से न पहुंचने से रिफाइनरी में गैस के स्टॉक लेवल नीचे आने लगे हैं। राज्य सरकारों और तेल कंपनियों के स्तर पर इसे लेकर चिंता बढ़ती जा रही है कि अगर यह तंगी जारी रही तो आम उपभोक्ताओं तक गैस सप्लाई पर असर दिख सकता है।

10 किलो वाला सिलेंडर

इसी पृष्ठभूमि में तेल कंपनियों और सरकारी हलकों के बीच एक प्रस्ताव गर्माया हुआ है, यह कि 14.2 किलो क्षमता वाले सिलेंडर में पूरा 14 किलो गैस न भरा जाए, बल्कि उसमें लगभग 10 किलो गैस भरकर उपलब्ध कराया जाए। इसे लेकर यह तर्क दिया जा रहा है कि छोटे आकार के सिलेंडर से उपलब्ध गैस की मात्रा को अधिक घरों तक पहुंचाया जा सकेगा। वर्तमान में औसतन 14.2 किलो वाला सिलेंडर एक छोटे-मध्यम परिवार के लिए लगभग 35-40 दिन तक चलता माना जाता है, जबकि 10 किलो वाला सिलेंडर लगभग एक महीने तक चल सकेगा।

इस संभावित बदलाव पर गौर करते हुए यह भी तय की संभावना है कि 10 किलो सिलेंडर की कीमत भी उसी अनुपात में कम रखी जाए। यानी जो दाम आज 14.2 किलो पर लग रहा है, उसका लगभग 70-72 प्रतिशत हिस्सा नए छोटे वजन वाले सिलेंडर पर लागू हो सकता है। साथ ही, हर सिलेंडर पर नए स्टिकर लगाकर स्पष्ट रूप से लिखा जाना तय किया गया है कि यह “10 किलो” या “कम वजन वाला” सिलेंडर है, ताकि उपभोक्ता को कोई भ्रम न हो।

Also Read- Aadhaar और PAN कार्ड के बदल गए नियम! 2026 में हुए ये बड़े डिजिटल बदलाव; अनदेखी की तो बंद हो सकता है बैंक खाता

सरकार की तरफ से क्या दावा?

सरकारी सूत्र बार-बार दावा कर रहे हैं कि घरेलू उपयोग के लिए कोई बड़ी कमी या कटौती की बात नहीं है, बल्कि यह एक तरह की सावधानी और आपातकालीन योजना मात्र है। इसी कड़ी में कई राज्यों में ESMA जैसे कानूनी ढांचे के तहत रिफाइनरी, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन पर निगरानी बढ़ाई गई है। इसका मकसद यह भी है कि कोई भी ऐसा व्यवहार न हो जिससे गैस की आपूर्ति उपभोक्ता तक न पहुंच पाए।

साथ ही, कई शहरों में यह भी नियम लागू किए जा रहे हैं कि एक नया सिलेंडर बुक करने से पहले पिछले सिलेंडर के खत्म होने के बाद कम से कम 21-25 दिन का गैप रखा जाए, ताकि लोग बिना जरूरत के अतिरिक्त बुकिंग न करें और स्टॉक की दुरुपयोग न हो।

आम उपभोक्ता के लिए क्या सावधानी जरूरी?

अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो लोगों को यह जांच जरूर करनी होगी कि जो सिलेंडर उन्हें दिया जा रहा है, उस पर वास्तविक वजन और दाम साफ लिखा हुआ हो। अगर कोई एजेंसी या डीलर बिना स्पष्ट लेबल या बिना जानकारी के अतिरिक्त राशि वसूलता है या वजन कम करके दिखाता है तो ग्राहक तेल कंपनी की हेल्पलाइन, राज्य उद्योग विभाग या उपभोक्ता फोरम तक शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

देश के लगभग हर छोटे-मध्यम घर में आज LPG की अहम जगह है, इसलिए इस तरह की नीतिगत योजनाएं सीधे रसोईघर की बजट और अनुभव को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल 14 किलो वाला सिलेंडर राष्ट्रीय स्तर पर बंद नहीं किया गया है, बल्कि 10 किलो वाला सिलेंडर एक प्रस्तावित और अस्थायी विकल्प के रूप में सामने आ रहा है, जो वैश्विक आपूर्ति की अस्थिरता के दौर में प्रशासन के लिए एक राशनिंग-जैसा उपाय साबित हो सकता है।

Author
info@nitap.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार