आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज प्लान्स की कमियों पर तीखा प्रहार किया है। उनका कहना है कि दैनिक डेटा का बचा हिस्सा आधी रात को खत्म हो जाना उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। चड्ढा ने सुझाव दिया कि बाकी डेटा अगले दिन इस्तेमाल करने योग्य रहे, जिससे करोड़ों यूजर्स को राहत मिले।

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चड्ढा का संसदीय हस्तक्षेप
चड्ढा ने बहस में स्पष्ट किया कि जियो, एयरटेल और वोडाफोन जैसे ऑपरेटर्स 1.5 से 3 जीबी रोजाना डेटा देते हैं। लेकिन 24 घंटे बाद यह शून्य हो जाता है, भले ही यूजर ने कम खर्च किया हो। 28 दिनों की वैलिडिटी के चलते साल में 13 रिचार्ज जरूरी हो जाते हैं। उन्होंने मांग की कि प्लान्स 30-31 दिनों के कैलेंडर माह पर आधारित हों। साथ ही अंतिम रिचार्ज के बाद एक साल तक मुफ्त इनकमिंग कॉल्स और एसएमएस तथा तीन साल तक नंबर सक्रिय रखा जाए।
मौजूदा पॉलिसी की खामियां
प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां दैनिक डेटा रीसेट को सख्ती से लागू करती हैं। बचा डेटा न तो रोलओवर होता है और न रिफंड मिलता है। कुछ सरकारी ऑपरेटर्स ने पहले ऐसा विकल्प आजमाया था, लेकिन व्यापक स्तर पर यह सुविधा नदारद है। उपभोक्ता शिकायतें बढ़ रही हैं, जहां लोग अतिरिक्त खर्च से परेशान हैं। चड्ढा ने इसे उपभोक्ता अधिकारों का हनन बताया।
सोशल मीडिया पर जोरदार बहस
चड्ढा की अपील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लाखों यूजर्स ने समर्थन जताया और डेटा रोलओवर की मांग तेज हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव लागू करने से कंपनियों को तकनीकी निवेश करना पड़ेगा। फिर भी उपभोक्ता दबाव से नियमों में बदलाव संभव है।
TRAI और सरकार की भूमिका
टेलीकॉम नियामक TRAI को अब इस पर विचार करना होगा। मंत्री ने मुद्दे को संज्ञान में लेने की बात कही है। अगर सिफारिशें लागू हुईं, तो 100 करोड़ प्रीपेड यूजर्स लाभान्वित होंगे। डिजिटल इंडिया के दौर में यह कदम उपभोक्ता हितों को मजबूत करेगा। बहस जारी है, और निकट भविष्य में फैसला अपेक्षित है।
यह बदलाव मोबाइल यूजर्स के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। उपभोक्ता संगठनों ने भी चड्ढा के पक्ष का साथ दिया है।
















