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वजन घटाने वाली दवाओं पर सरकार की ‘स्ट्राइक’! Ozempic और Wegovy जैसी दवाओं के विज्ञापनों पर लगा बैन; जानें क्या है असली वजह

भारत सरकार ने Ozempic, Wegovy जैसी दवाओं के विज्ञापनों पर बैन लगा दिया। बिना डॉक्टर सलाह के दुरुपयोग रोकने को ये कदम उठाया। साइड इफेक्ट्स से बचाव मुख्य कारण। अब सिर्फ पर्ची पर मिलेंगी।

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मोटापे से निपटने की होड़ में युवाओं का नया शौक बन चुकी Ozempic, Wegovy और Mounjaro जैसी इंजेक्शन दवाओं के विज्ञापनों पर केंद्र सरकार ने पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले औषधि नियंत्रण संगठन ने हाल ही में फार्मा कंपनियों को साफ निर्देश जारी किए हैं। अब ये दवाएं न तो टीवी पर चमकेंगी, न सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स के हाथों बिकेंगी। इसका मतलब साफ है, बिना डॉक्टर की सलाह कोई इनका प्रचार या इस्तेमाल नहीं करेगा।

वजन घटाने वाली दवाओं पर सरकार की 'स्ट्राइक'! Ozempic और Wegovy जैसी दवाओं के विज्ञापनों पर लगा बैन; जानें क्या है असली वजह

क्यों पड़ा ब्रेक?

ये दवाएं असल में डायबिटीज के मरीजों के लिए बनी हैं, खासकर टाइप-2 वाली। इनमें मौजूद सेमाग्लूटाइड और टिरजेपेटाइड जैसे तत्व भूख कम करते हैं और वजन घटाने में मदद करते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटीज के ग्लैमरस ऐड्स ने इन्हें जादुई गोली बना दिया। नतीजा? लाखों लोग बिना चेकअप के इन्हें लगवा रहे थे। इससे पेट दर्द, उल्टी, ब्लड शुगर का गड़बड़ाना और लंबे समय में थायरॉइड जैसी गंभीर परेशानियां सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिर्फ BMI 30 से ऊपर वालों के लिए डॉक्टर की नजर में ही ठीक हैं। बाकी लोगों के लिए खतरा ज्यादा, फायदा कम।

प्रचार का खेल बंद

सरकार ने साफ कहा है कि तेज वजन घटाने का दावा करने वाले विज्ञापन भ्रामक हैं। चाहे डायरेक्ट ऐड हो या डिजीज अवेयरनेस कैंपेन के बहाने प्रचार, सब बंद। कंपनियों को अब सच्ची जानकारी देनी होगी जोखिम क्या हैं, डाइट-एक्सरसाइज क्यों जरूरी है और डॉक्टर कब मिले। मार्च में कुछ दवाओं के पेटेंट खत्म होने से सस्ते जेनेरिक आने वाले थे, जिससे बाजार में अवैध बिक्री का डर था। दिल्ली कोर्ट ने भी कुछ कंपनियों पर रोक लगाई, ताकि पेटेंट चोरी न हो।

कौन सी दवाएं प्रभावित?

Ozempic और Wegovy (सेमाग्लूटाइड आधारित), Mounjaro (टिरजेपेटाइड वाली) और Orlistat जैसी दवाएं अब सिर्फ प्रिस्क्रिप्शन पर मिलेंगी। फार्मेसी में बिना पर्ची कोई नहीं देगा। भारत में करीब 15 करोड़ लोग मोटापे से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार जीवनशैली बदलाव पर जोर दे रही है। जिम, संतुलित खाना और नियमित चेकअप ही असली हथियार हैं।

आगे क्या?

फार्मा कंपनियां नियम मानने को तैयार हैं, लेकिन उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द या भारी जुर्माना हो सकता है। यह कदम न सिर्फ स्वास्थ्य बचाएगा, बल्कि फार्मा मार्केट को ईमानदार बनाएगा। क्या इससे वजन घटाने का गलत बाजार थमेगा? समय जवाब देगा। फिलहाल, डॉक्टर से सलाह लें, ऐड्स पर भरोसा न करें।

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info@nitap.in

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