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सावधानी हटी, तो लग जाएगा चूना! ऐसे होती है पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी, चिप और रिमोट का ये खेल समझें

50 लीटर भरवाया, लेकिन सिर्फ 45 ही मिला? रिमोट दबाते ही गायब हो जाता तेल। रोज हजारों लोग ठगे जा रहे, आप भी हो सकते हो शिकार। जान लो ये गंदा खेल, वरना जेब खाली हो जाएगी!

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रोजाना सुबह की भागदौड़ में पेट्रोल पंप पर रुकना किसे नया लगता है। लेकिन कई जगहों पर यह रुकना महंगा साबित हो रहा है। छोटे-छोटे हाई-टेक उपकरणों के जरिए ग्राहकों को कम ईंधन देकर पैसे वसूले जा रहे हैं। यह धंधा इतना शातिराना है कि आंखों के सामने चोरी हो जाती है और पता भी नहीं चलता।

सावधानी हटी, तो लग जाएगा चूना! ऐसे होती है पेट्रोल पंप पर तेल की चोरी, चिप और रिमोट का ये खेल समझें

हाई-टेक चोरी की पूरी प्रक्रिया

पेट्रोल पंप की डिस्पेंसिंग मशीन में मामूली छेड़छाड़ से यह खेल शुरू होता है। नोजल के पास एक छोटी चिप फिट कर दी जाती है, जो मशीन के सर्किट से जुड़ जाती है। यह चिप एक रिमोट कंट्रोल से चलती है। रिमोट में कुछ बटन होते हैं, जैसे A, B या C। हर बटन एक निश्चित प्रतिशत चोरी तय करता है।

उदाहरण लें तो 50 लीटर भरवाने की रीडिंग पर सिर्फ 45 या 47 लीटर ही टैंक में जाता है। चिप मीटर के पल्स को तेज कर देती है, जिससे मशीन ज्यादा मात्रा दिखाती है। पंप का कर्मचारी जेब में रिमोट रखे दूर से बटन दबाता है। ग्राहक को भनक तक नहीं लगती। एक दिन में हजारों रुपये का नुकसान ऐसे ही होता रहता है। यह चिपें बाहर से मंगाई जाती हैं और आसानी से लगाई जा सकती हैं।

देशभर में फैला यह नेटवर्क

पिछले सालों में कई शहरों से ऐसी खबरें सामने आई हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों के पंपों पर छापों में सैकड़ों चिपें बरामद हुईं। एक मामले में सात पंप एक साथ सील हो गए थे। वहां मालिकों समेत कई लोग पकड़े गए। एक आरोपी ने खुद बताया कि सैकड़ों पंपों पर ऐसी व्यवस्था पहले से थी।

महाराष्ट्र के एक शहर में लग्जरी गाड़ियों और ट्रकों को निशाना बनाया जाता था। पंजाब में भी सेल्समैन इस खेल के साझीदार निकले। ये गिरोह इलेक्ट्रीशियनों की मदद से मशीनें तार-तार करते थे। सालाना करोड़ों का काला कारोबार इसी से चलता था। तेल कंपनियों ने कई डीलरशिपें रद्द कीं, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई।

पुरानी कमजोरियां, नई चुनौतियां

आजकल ईंधन महंगा होने से यह चोरी और घातक है। पुरानी मशीनों में छेड़छाड़ आसान है। नई तकनीक जैसे RFID या स्मार्ट मीटर आ रहे हैं, लेकिन सभी जगह लागू नहीं हुए। शहरों में ट्रैफिक जाम के बीच लोग जल्दी में भरवाते हैं, ठगों को मौका मिल जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि मीटर की सॉफ्टवेयर में भी हेराफेरी संभव है।

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खुद को बचाएं, ये करें अपनाएं

ईंधन भरते समय वाहन से उतरें और पूरी प्रक्रिया देखें। नोजल पर कोई असामान्य तार या उपकरण तो नहीं। मीटर साफ जीरो से शुरू हो रहा है या नहीं। रसीद जरूर लें। राउंड अमाउंट जैसे 500 रुपये से बचें। इसके बजाय 530 या 1575 जैसा चुनें, चोरी मुश्किल हो जाती है।

माइलेज पर नजर रखें। घर लौटकर चेक करें कि औसत सही है या नहीं। शक हो तो स्थानीय वजन-माप विभाग या तेल कंपनी की हेल्पलाइन पर कॉल करें। कई जगह CCTV लगे हैं, उनकी रिकॉर्डिंग मांगें। जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

सख्ती की जरूरत

सरकार को नियम सख्त करने होंगे। सभी पंपों पर नई मशीनें लगवाएं। नियमित जांच और सजा बढ़ाएं। तेल कंपनियां मैकेनिकों की निगरानी करें। ग्राहक संगठन भी अभियान चलाएं। यह सिर्फ पैसे की चोरी नहीं, भरोसे का सवाल है।

सावधान रहें, हर लीटर पर नजर रखें। एक छोटी सी चिप आपकी जेब खाली कर सकती है। जागें, तो चूना नहीं लगेगा।

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info@nitap.in

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