भारतीय परिवारों में सोना संपत्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादियों और त्योहारों पर लाखों लोग इसकी खरीदारी करते हैं। लेकिन आयकर विभाग की निगाहें हमेशा बिना हिसाब के सोने पर टिकी रहती हैं। अगर आपके पास सही दस्तावेज न हों तो जांच के दौरान परेशानी हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोई कठोर ऊपरी सीमा तो तय नहीं लेकिन सामान्य स्वीकार्य मात्रा से ज्यादा होने पर स्रोत बताना जरूरी होता है।

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व्यक्ति के आधार पर तय सीमाएं
विभाग के मानदंडों में लिंग और वैवाहिक स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विवाहित महिलाएं 500 ग्राम तक आभूषण बिना कागजात के रख सकती हैं। अविवाहित महिलाओं के लिए यह 250 ग्राम है। पुरुष चाहे शादीशुदा हों या नहीं उनके लिए 100 ग्राम तक की छूट है। एक चार सदस्यीय परिवार में पति-पत्नी मिलाकर 600 ग्राम तक बिना किसी पूछताछ के रखा जा सकता है। ये सीमाएं पारंपरिक स्ट्रिडहैन प्रथा को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं। अमृतसर जैसे शहरों में शादी के सीजन में सोने की मांग चरम पर रहती है इसलिए लोग सावधानी बरत रहे हैं।
सीमा लांघने पर नुकसान
अगर रखा गया सोना इन मात्राओं से अधिक हो तो तुरंत जब्ती नहीं होती। जांच में खरीदी का बिल पुराना आयकर रिटर्न उपहार का प्रमाण या विरासत के दस्तावेज दिखाने पड़ते हैं। स्रोत न साबित होने पर इसे अघोषित आय मान लिया जाता है। ऐसे में मूल्य का 60 से 100 प्रतिशत तक टैक्स और पेनल्टी लग सकती है। मान लीजिए 1 किलो सोना बरामद होता है जो आज 80 लाख रुपये का है। पूरा मूल्य कर योग्य हो जाता है। पंजाब में पिछले वर्ष कई छापों में परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। डिजिटल लेनदेन और बैंक रिकॉर्ड से अब ट्रैकिंग पहले से आसान हो गई है।
बिक्री के समय टैक्स का जाल
सोना बेचते समय भी नियम सख्त हैं। अगर दो साल से कम होल्डिंग पीरियड है तो लाभ आपकी आय स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है जो 30 प्रतिशत तक जा सकता है। दो साल बाद लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20 प्रतिशत के साथ इंडेक्सेशन लाभ मिलता है। विरासत में मिला सोना टैक्स मुक्त होता है लेकिन उसकी स्टांप वैल्यू सिद्ध करनी पड़ती है। हालिया बदलावों से कैपिटल गेन की गणना और कठिन हो गई है। खरीदी पर 3 प्रतिशत जीएसटी भी अनिवार्य है जो बिना बिल के जोखिम बढ़ाता है।
सुरक्षित रखने के उपाय
वित्तीय सलाहकार सलाह देते हैं कि हर खरीदी का बिल सहेजकर रखें। बैंक लॉकर का प्रयोग करें और आयकर रिटर्न में सोने का ब्योरा भरें। डिजिटल गोल्ड या म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प सुरक्षित हैं। अमृतसर के ज्वेलर्स से प्रमाणित खरीदारी करें। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत अब ऑनलाइन रिकॉर्ड अनिवार्य हो रहे हैं। भविष्य में घरेलू संपत्ति की जांच और सख्त हो सकती है।
सोना धन का स्रोत है लेकिन नियमों का पालन न करने से बोझ बन जाता है। इन सीमाओं का ध्यान रखें और परिवार की संपत्ति सुरक्षित रखें। अधिक जानकारी के लिए सरकारी आयकर वेबसाइट पर जाएं।
















