मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए 12 राज्यों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण है, जो किसानों की फसलों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। रबी मौसम में गेहूं, सरसों जैसी फसलें कटाई के दौर में हैं, ऐसे में यह मौसम किसानों की मेहनत बर्बाद कर सकता है।

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प्रभावित क्षेत्रों की पूरी सूची
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, सिक्किम, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र इन राज्यों में तेज हवाएं, गरज चमक के साथ मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि का अनुमान है। दक्षिण के तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भी बादल छाए रहेंगे। पंजाब जैसे गेहूं उत्पादक क्षेत्रों में बादल घने होने से किसानों में बेचैनी है। यह अलर्ट 24 से 26 फरवरी तक लागू रहेगा। हवाओं की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो सकती है।
किसानों पर संकट का साया
रबी फसलें अभी अपनी संवेदनशील अवस्था में हैं। ओलावृष्टि से डंठल टूट सकते हैं, जबकि लगातार बारिश नमी बढ़ाकर फफूंद रोग फैला सकती है। पंजाब-हरियाणा बेल्ट पहले ठंडी लहरों से प्रभावित हो चुका है, अब यह नया संकट नुकसान को कई गुना बढ़ा सकता है। किसान नेता बताते हैं कि पिछले मौसमों में इसी तरह की घटनाओं ने लाखों का नुकसान पहुंचाया था। जमीनी स्तर पर तिरपाल या प्लास्टिक की कमी से ढकाव का काम मुश्किल हो रहा है। सरकार बीमा योजनाओं का जिक्र कर रही है, लेकिन किसान तत्काल राहत चाहते हैं।
IMD की अहम सलाह
मौसम विभाग ने किसानों को फसलों को तिरपाल से ढकने, पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान तैयार करने और सूखा चारा जमा करने की हिदायत दी है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का डर है, इसलिए यात्रा सतर्कता से करें। आम लोगों को बिजली गिरने और तेज हवाओं से बचने को कहा गया है। कृषि विभाग ने हेल्पलाइन शुरू की है, जिससे किसान तुरंत मदद ले सकें। एनडीआरएफ की टीमें हाई अलर्ट पर हैं।
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जलवायु परिवर्तन का संकेत
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब सर्दी के अंत में भी असामान्य रूप से सक्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के पैटर्न बिगड़ रहे हैं। इससे न केवल फसल चक्र प्रभावित हो रहा है, बल्कि खाद्य उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। बाजार में अनाज के दामों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। मौसम विभाग लगातार निगरानी रख रहा है और अपडेट देता रहेगा।
किसानों के लिए सुरक्षा उपाय
किसानों को सलाह है कि खेतों का दौरा कम करें, पशुओं को घर के अंदर रखें और मौसम रडार ऐप पर नजर रखें। ग्राम स्तर पर आपदा प्रबंधन समितियां सक्रिय हो गई हैं। यदि नुकसान होता है, तो जल्द से जल्द सर्वे करवाएं ताकि मुआवजा मिल सके। यह मौसम प्रकृति का इशारा है कि किसानों को अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना होगा। आधुनिक कृषि तकनीक और बीमा पर जोर देना जरूरी है। कुल मिलाकर, सतर्कता ही एकमात्र हथियार है।
















