आज के डिजिटल दौर में पैन कार्ड सिर्फ एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय जिंदगी की रीढ़ बन चुका है। सरकार की नई नीतियों ने इसे अनिवार्य बना दिया है, खासकर इनकम टैक्स, बैंकिंग, लोन और निवेश जैसे क्षेत्रों में। बिना इसके कई बड़े काम अधर में लटक जाते हैं, जिससे नुकसान तो होता ही है, परेशानी भी बढ़ जाती है। आइए समझते हैं इन चार प्रमुख क्षेत्रों को जहां पैन कार्ड की कमी भारी पड़ती है।

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इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग में पहला झटका
हर साल अप्रैल-जुलाई के बीच करोड़ों लोग आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। लेकिन बिना पैन के यह प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाती। पैन आपकी कर पहचान का आधार है, जो विभाग को आपकी सारी आय और कटौतियों का हिसाब रखने में मदद करता है। अगर आधार से लिंक न हो, तो रिटर्न अस्वीकार हो जाता है। नतीजा, देरी का जुर्माना लगता है। साथ ही, सैलरी या ब्याज पर कटने वाले टीडीएस की दर दोगुनी हो जाती है। मसलन, सामान्य 10 प्रतिशत की जगह 20 प्रतिशत कट जाता है, जिसका रिफंड पाना मुश्किल। फ्रीलांसर्स और छोटे व्यापारियों के लिए यह सबसे बड़ा रोड़ा है।
बैंकिंग लेन-देन पर सख्त पाबंदी
बैंक खाते में 50 हजार रुपये से ज्यादा कैश जमा या निकालना हो, तो पैन नंबर मांग लिया जाता है। आरबीआई के नियमों के तहत बिना इसके ट्रांजेक्शन रोक दिया जाता है और यह सीधे टैक्स विभाग को रिपोर्ट हो जाता है। आने वाले समय में यह सीमा और सिकुड़ सकती है, जिससे रोजमर्रा के बड़े लेन-देन प्रभावित होंगे। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों को फसल बिक्री के बाद लाखों रुपये जमा करने में दिक्कत आ रही है। कई ग्रामीण खाते अभी भी पैन से जुड़े नहीं, जिससे जांच का डर बना रहता है। छोटे जमा भी अब निगरानी में हैं।
लोन और क्रेडिट स्कोर पर असर
घर, गाड़ी या बिजनेस लोन चाहिए, तो बैंक सबसे पहले पैन मांगता है। यह सिबिल स्कोर से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री चेक करने का जरिया है। बिना पैन के फ्रॉड का पता लगाना कठिन होता है, इसलिए आवेदन खारिज हो जाता है। युवा उद्यमी और किसान क्रेडिट कार्ड लेने वालों को इससे झटका लगता है। आपका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत न होने से ब्याज दरें भी ऊंची लगती हैं। बाजार में 15-20 प्रतिशत लोन आवेदन इसी कमी से फेल हो जाते हैं। पैन लिंक न होने से पुरानी ट्रांजेक्शन हिस्ट्री भी गायब हो जाती है।
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निवेश और टीडीएस क्लेम में नुकसान
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी खरीदी में निवेश करना हो, तो पैन अनिवार्य है। बिना इसके टीडीएस अधिक कटता है और रिफंड क्लेम नहीं होता। प्रॉपर्टी डील या स्टांप पेपर खरीदते समय भी यही समस्या आती है। निवेशकों की कमाई का बड़ा हिस्सा टैक्स में चला जाता है। विदेशी आय वाले एनआरआई तो दोगुना नुकसान झेलते हैं। छोटे निवेशक भी अब सतर्क हो रहे हैं, क्योंकि नई रिपोर्टिंग नियम सबको कवर करेंगे।
समाधान के आसान उपाय
घबराने की जरूरत नहीं। इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर तत्काल ई-पैन बनवाएं, जो आधार से लिंक होकर मिनटों में मिल जाता है। बैंक जाकर खाते को लिंक करवाएं। पंजाब सरकार की योजनाओं जैसे किसान सम्मान निधि में भी पैन जरूरी हो रहा है। समय रहते कार्रवाई करें, वरना वित्तीय परेशानियां बढ़ेंगी। ये बदलाव कालेधन रोकने के लिए हैं, लेकिन आम आदमी को जागरूक रहना होगा।
















