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पुराना इनवर्टर फेंकने की जरूरत नहीं! सिर्फ ₹500 के इस छोटे डिवाइस से बनाएं ‘सोलर इनवर्टर’, अब फ्री में चलेंगी घर की लाइटें

घर की लाइटें अब फ्री बिजली से चलेंगी। आसान तरीके से पुराने इनवर्टर को सोलर पावर पर कन्वर्ट करें। बिल कम करें और बिजली बचाएं। घर पर ही ट्राई करें, फायदा देखें।

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घरों में बिजली की बढ़ती लागत और कटौती की समस्या से जूझ रहे लाखों परिवारों के लिए एक आसान और किफायती उपाय उभर कर सामने आया है। अब जरूरी नहीं कि आप अपना पुराना इनवर्टर फेंक दें। एक साधारण सा छोटा उपकरण मात्र कुछ सौ रुपये में जोड़कर इसे सोलर इनवर्टर में बदल सकते हैं। इससे दिन भर धूप की ऊर्जा से घर की लाइटें, पंखे बिना किसी बिजली बिल के चल सकते हैं। यह तरीका खासकर पंजाब जैसे राज्यों में उपयोगी है जहां सूरज की रोशनी भरपूर मिलती है और बिजली संकट आम बात है।

पुराना इनवर्टर फेंकने की जरूरत नहीं! सिर्फ ₹500 के इस छोटे डिवाइस से बनाएं 'सोलर इनवर्टर', अब फ्री में चलेंगी घर की लाइटें

यह कैसे काम करता है?

यह प्रक्रिया पुराने इनवर्टर की बैटरी को सोलर पैनल से सीधे जोड़ने पर आधारित है। एक विशेष चार्ज नियंत्रक उपकरण सोलर पैनल से आने वाली डायरेक्ट करंट को बैटरी में सुरक्षित रूप से स्टोर करता है। दिन के समय सूरज की किरणें पड़ते ही यह स्वतः सक्रिय हो जाता है और बिजली ग्रिड पर निर्भरता कम हो जाती है। रात में यह सामान्य इनवर्टर की तरह बैटरी या ग्रिड से काम करता रहता है। एक छोटा 100-200 वाट का सोलर पैनल लगाने पर 4 से 6 घंटे तक फ्री बिजली मिल सकती है, जो रोजाना 1 किलोवाट तक की बचत करता है। कुल मिलाकर बिजली बिल में 20-30 प्रतिशत की कमी आ सकती है।

लागत और सामग्री

पूरी व्यवस्था की लागत बेहद कम है। मुख्य उपकरण यानी सोलर चार्ज कंट्रोलर की कीमत 500 से 1500 रुपये के बीच होती है। इसके अलावा एक बेसिक सोलर पैनल 3000 से 5000 रुपये में उपलब्ध है। कुछ तार, कनेक्टर और बेसिक टूल्स मिलाकर कुल खर्च 5000 से 10000 रुपये तक रह जाता है। यह नया सोलर इनवर्टर खरीदने के मुकाबले कई गुना सस्ता है, जो अक्सर 20000 रुपये से ज्यादा का होता है। लुधियाना की लोकल सोलर दुकानों पर ये सामान आसानी से मिल जाता है।

लगाने की प्रक्रिया

यह प्रक्रिया घर पर ही की जा सकती है और ज्यादा जटिल नहीं है। चरणबद्ध तरीके से निम्नलिखित कदम अपनाएं:

  • सबसे पहले इनवर्टर की बैटरी टर्मिनल को खाली करें और सोलर चार्ज कंट्रोलर को बैटरी के पॉजिटिव-नेगेटिव से जोड़ें।
  • सोलर पैनल के तारों को चार्ज कंट्रोलर के सोलर इनपुट पोर्ट में लगाएं।
  • पैनल को छत या खुली जगह पर धूप वाली दिशा में स्थापित करें।
  • मल्टीमीटर से वोल्टेज जांचें और सुनिश्चित करें कि सब कुछ पैरेलल कनेक्शन में ठीक है।
  • प्राथमिकता सेट करें ताकि दिन में सोलर पहले चले, फिर ग्रिड और आखिर में बैटरी।
    यह काम 1-2 घंटे में पूरा हो जाता है। हालांकि शुरुआती बार किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लें।

फायदे और सावधानियां

इस व्यवस्था से न केवल बिजली बिल घटता है बल्कि पर्यावरण की रक्षा भी होती है। पुराना उपकरण बेकार नहीं जाता और सोलर ऊर्जा अपनाने का आसान प्रवेश द्वार मिलता है। लाइट्स और पंखों जैसा 200-300 वाट लोड आसानी से संभल जाता है। भविष्य में इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है। मजबूत तारों का इस्तेमाल करें, पानी से बचाव करें और गलत कनेक्शन से बचें। सस्ते नकली उत्पादों से दूर रहें जो जल्दी खराब हो सकते हैं। सरकारी योजनाओं जैसे पीएम सूर्य घर मुफ्त सब्सिडी का लाभ उठाएं। लंबे समय के लिए सोचें तो पूरा सोलर सिस्टम लगाना बेहतर विकल्प है।

यह सरल बदलाव मध्यम वर्ग के लिए वरदान साबित हो सकता है। बिजली संकट के इस दौर में सोलर ऊर्जा अपनाएं और स्वावलंबी बनें। आज ही शुरुआत करें। 

Author
info@nitap.in

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