
इनकम टैक्स विभाग ने टैक्स चोरी की कमर तोड़ने के लिए नया हथियार उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से हाउस रेंट अलाउंस (HRA) क्लेम के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव लागू होने वाला है। अब सैलरीड कर्मचारियों को सिर्फ किराए की रसीदें जमा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मकान मालिक से अपने रिश्ते का खुलासा भी अनिवार्य होगा। यह कदम फर्जी HRA दावों पर लगाम लगाने और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकार ने इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिसमें फॉर्म 124 को नए सिरे से डिजाइन किया गया है। पुराने फॉर्म 12BB की जगह यह नया फॉर्म लेगा। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) ने स्टेकहोल्डर्स से सुझाव मांगे हैं, और अंतिम अधिसूचना मार्च में आने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव करदाताओं के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन आवश्यक साबित होगा।
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क्यों लाया गया यह नया नियम?
पिछले वर्षों में टैक्स अधिकारियों ने पाया कि कई कर्मचारी रिश्तेदारों को किराया दिखाकर HRA छूट हासिल कर लेते थे। माता-पिता, पति-पत्नी या भाई-बहन को किराया देकर टैक्स बचाना आम प्रथा बन गई थी, लेकिन अक्सर ये लेन-देन कागजी होते थे। किराया कैश में दिया जाता या लैंडलॉर्ड ITR में आय नहीं दिखाता। नतीजा? अरबों रुपये का राजस्व नुकसान।
नए ड्राफ्ट नियम इस खामी को दूर करते हैं। अब HRA क्लेम के लिए फॉर्म 124 में निम्नलिखित विवरण भरना होगा:
- मकान मालिक का पूरा नाम और पता।
- PAN नंबर या आधार (यदि किराया सालाना 1 लाख से अधिक हो)।
- रिश्ता: पिता, माता, पति/पत्नी, भाई/बहन, अन्य रिश्तेदार या ‘कोई नहीं’।
- रेंट एग्रीमेंट, रसीदें और बैंक स्टेटमेंट।
यह खुलासा विभाग को क्रॉस-वेरिफिकेशन आसान बनाएगा। लैंडलॉर्ड का ITR, प्रॉपर्टी रजिस्ट्री और बैंक ट्रांजेक्शन चेक होंगे। अगर रिश्ता छुपाया गया या गलत जानकारी दी गई, तो सेक्शन 270A के तहत टैक्स राशि का 200% तक जुर्माना लग सकता है।
किसे पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
यह नियम मुख्य रूप से मेट्रो शहरों के लाखों सैलरीड कर्मचारियों को प्रभावित करेगा, जहां HRA टैक्स छूट का बड़ा हिस्सा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले प्रोफेशनल्स, जो माता-पिता के फ्लैट में रहकर किराया दिखाते हैं, अब सतर्क हो जाएं। उदाहरण के लिए, अगर कोई बेटा अपनी मां को 20,000 रुपये मासिक किराया देता है, तो फॉर्म में ‘माता’ लिखना होगा और मां को ITR में यह आय दिखानी पड़ेगी।
विशेषज्ञ कहते हैं कि वास्तविक किराया भुगतान अब भी वैध रहेगा, बशर्ते यह मार्केट रेट पर हो। बैंक ट्रांसफर अनिवार्य होगा, कैश पेमेंट पर शक होगा। छोटे शहरों या ग्रामीण इलाकों में किराया कम होने पर असर कम होगा, लेकिन बड़े दावों पर नजर रहेगी।
अनुपालन के लिए क्या करें?
HRA क्लेम सुरक्षित रखने के लिए ये कदम उठाएं:
- रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर कराएं: स्टांप पेपर पर लिखित समझौता, जिसमें किराया, अवधि और शर्तें स्पष्ट हों।
- बैंक से भुगतान: हर महीने NEFT/RTGS/UPI से ट्रांसफर, कैश अवॉइड करें।
- लैंडलॉर्ड दस्तावेज: PAN, आधार और संपत्ति के कागजात लें।
- ITR चेक: सुनिश्चित करें कि लैंडलॉर्ड किराया अपनी रिटर्न में दिखाए।
- फॉर्म 124 सही भरें: रिश्ता छुपाएं नहीं, गलती पर नोटिस आ सकता है।
| पहले vs अब: HRA क्लेम में बदलाव | पहले | अब |
|---|---|---|
| फॉर्म | 12BB | 124 |
| रिश्ता खुलासा | वैकल्पिक | अनिवार्य |
| PAN जरूरी | 1 लाख से ऊपर | हमेशा (रिश्तेदार पर) |
| वेरिफिकेशन | मैनुअल | ऑटोमेटेड + क्रॉस चेक |
| पेनल्टी | सामान्य | 200% तक |
सरकार का दूरगामी उद्देश्य
यह बदलाव डिजिटल इंडिया और फेसलेस असेसमेंट का हिस्सा है। विभाग AI टूल्स से डेटा एनालिसिस करेगा, जिससे फर्जी क्लेम पकड़ना आसान हो जाएगा। पिछले साल 50,000 करोड़ रुपये के फर्जी HRA दावे पकड़े गए थे। नया नियम राजस्व बढ़ाने के साथ टैक्स संस्कृति मजबूत करेगा।
कई करदाता चिंतित हैं, लेकिन CA नितिन गंगर जैसे विशेषज्ञ सलाह देते हैं: “सचेत रहें, दस्तावेज सही रखें।” अगर सब वैध है, तो HRA क्लेम जारी रहेगा। सरकार ने साफ कहा- फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं। कुल मिलाकर, 1 अप्रैल से HRA क्लेम आसान नहीं, लेकिन पारदर्शी जरूर हो जाएगा। सैलरीड वर्ग को अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
















