
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मतदाताओं के लिए अपने वोटर आईडी कार्ड को आधार से लिंक करना अब अनिवार्य हो गया है, संदेश में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि कोई मतदाता ऐसा नहीं करता है, तो उसका नाम मतदाता सूची (Voter List) से काट दिया जाएगा।
Table of Contents
PIB फैक्ट चेक ने बताया सच
वायरल हो रहे इस दावे की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार की एजेंसी PIB Fact Check ने इसकी पड़ताल की है, पीआईबी ने इस दावे को पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है, पीआईबी के अनुसार, चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक के तहत आधार लिंक करने की प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) है, अनिवार्य नहीं।
चुनाव आयोग का रुख: नाम नहीं कटेगा
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने भी उच्चतम न्यायालय में यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने के लिए आधार नंबर देना अनिवार्य नहीं है, आयोग ने आश्वस्त किया है कि:
- आधार कार्ड न होने या लिंक न करने की स्थिति में किसी भी नागरिक का चुनावी डेटा या वोट देने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा।
- मतदाताओं से आधार विवरण एकत्र करने के लिए फॉर्म 6B का उपयोग किया जाता है, हालांकि, यदि कोई मतदाता आधार साझा नहीं करना चाहता, तो वह अन्य वैकल्पिक दस्तावेजों का उपयोग कर सकता है।
- इस लिंकिंग प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना और फर्जी वोटिंग पर रोक लगाना है।
सावधान रहें, अफवाहों पर न दें ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के भ्रामक संदेश मतदाताओं में डर पैदा करने के लिए फैलाए जाते हैं फरवरी 2026 तक की स्थिति के अनुसार, आधार को वोटर आईडी से जोड़ना मतदाता की अपनी इच्छा पर निर्भर है।
















