
सरकार ने डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए आधार और जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) को आपस में लिंक करने की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने की तैयारी कर ली है, ‘आधार लिंक्ड बर्थ रजिस्ट्रेशन’ (ALBR) के तहत अब बच्चों के जन्म पंजीकरण के साथ ही उनका आधार नंबर भी जनरेट कर दिया जाएगा।
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1 अप्रैल से लागू हो सकते हैं ये बड़े बदलाव
आगामी वित्तीय वर्ष से लागू होने वाले संभावित नियमों के तहत आम जनता के लिए कई प्रक्रियाएं बदलने वाली हैं:
- 1 अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र ही पहचान और जन्मतिथि का एकमात्र प्राथमिक प्रमाण होगा।
- स्कूल दाखिले, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, विवाह पंजीकरण और पासपोर्ट बनवाने के लिए अब केवल ऑनलाइन जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।
- उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड केवल पहचान का दस्तावेज है, इसे जन्मतिथि (DOB) के प्रमाण के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आधार अपडेट के नियमों में भी सख्ती
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधार कार्ड में सुधार को लेकर अब सख्ती बरती जा रही है:
- सिर्फ एक बार अपडेट: UIDAI के नियमों के मुताबिक, आधार में जन्मतिथि को जीवन में केवल एक बार ही बदला जा सकता है।
- डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन: अब आधार में जन्मतिथि बदलने के लिए केवल एक पंजीकरण संख्या वाला आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्र ही मान्य होगा। बार-बार दस्तावेज बदलकर उम्र घटाने या बढ़ाने के खेल पर रोक लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है।
पेरेंट्स के लिए जरुरी सलाह
यदि आपके बच्चे का जन्म 1 अक्टूबर 2023 के बाद हुआ है, तो सुनिश्चित करें कि आपके पास QR कोड वाला डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र हो पुराने कागज वाले प्रमाण पत्रों को भी अब CRS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन डिजिटल करवाया जा सकता है।
















