
आज के दौर में जहां खेती को घाटे का सौदा मानकर युवा शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, वहीं बिहार के अररिया जिले के एक प्रगतिशील किसान ने नई मिसाल पेश की है, किसान पवन कुमार ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ एक छोटा सा व्यवसाय शुरु कर न केवल अपनी तकदीर बदली, बल्कि आज वे सालाना ₹8 लाख का मुनाफा भी कमा रहे हैं।
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मात्र ₹38,000 के निवेश से बदली किस्मत
पवन कुमार की सफलता की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, उन्होंने बहुत ही सीमित संसाधनों के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी, उन्होंने मात्र ₹38,000 की लागत से एक मिनी आटा चक्की मशीन खरीदी, शुरुआत में यह एक छोटा कदम था, लेकिन उनकी मेहनत और बाजार की समझ ने इसे एक बड़े मुनाफे वाले बिजनेस में तब्दील कर दिया।
खेती और व्यापार का शानदार तालमेल
पवन कुमार केवल आटा चक्की पर ही निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे एक कुशल किसान भी हैं, वे अपनी 4 एकड़ जमीन पर मक्का, धान और गेहूं की उन्नत खेती करते हैं, उनके बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ है, वे अपने खेत में उपजे अनाज को अपनी ही चक्की में प्रोसेस करते हैं, जिससे उन्हें बिचौलियों से छुटकारा मिलता है और सीधा लाभ प्राप्त होता है।
सालाना ₹8 लाख का शुद्ध मुनाफा
स्थानीय स्तर पर शुद्ध आटे और पिसाई की बढ़ती मांग के चलते पवन कुमार का व्यापार तेजी से फैला आज खेती और आटा चक्की के संयुक्त प्रयास से उनकी वार्षिक आय ₹8 लाख के आंकड़े को पार कर गई है उनकी यह सफलता आसपास के युवाओं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
बढ़ रहा है एग्रो-बिजनेस का क्रेज
विशेषज्ञों का मानना है कि पवन कुमार जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि खेती को बिजनेस माइंडसेट के साथ किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोटी कमाई संभव है, सरकार की PMFME योजना जैसी योजनाएं भी अब छोटे किसानों को अपनी प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए 35% तक की सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, जिससे पवन जैसे उद्यमी किसानों को काफी संबल मिल रहा है।
















