उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक सशक्त कदम उठाया है। अब हर नवजात बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र सीधे माता-पिता के आधार नंबर से जुड़ जाएगा। यह बदलाव राज्य की सरकारी योजनाओं को पारदर्शी बनाने और हर दस्तावेज की तुरंत जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। उच्च अधिकारियों की बैठक में यह फैसला हुआ, जिसमें सभी विभागों को जल्द ही स्पष्ट निर्देश भेजे जाएंगे।

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फर्जी प्रमाण पत्रों का बढ़ता चलन
प्रदेश भर में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर उम्र में हेराफेरी के सैकड़ों मामले सामने आ चुके हैं। ग्रामीण इलाकों में पंचायत स्तर पर और शहरी क्षेत्रों में निजी अस्पतालों द्वारा गलत एंट्री की जाती रही है। इसका फायदा नौकरियों, छात्रवृत्तियों, पासपोर्ट और चुनावी प्रक्रियाओं में उठाया जाता रहा। एक हालिया घटना में कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले पर सख्ती दिखाई, जहां किसी ने अपनी जन्म तिथि में कई सालों का फर्क दिखाकर दस्तावेज बनवाने की कोशिश की। न्यायालय ने इसे संगठित धोखाधड़ी बताते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। ऐसे उदाहरणों ने सरकार को सतर्क कर दिया है।
नई प्रक्रिया कैसे काम करेगी?
सरकारी अस्पतालों में अब मां के अस्पताल से छुट्टी मिलने से ठीक पहले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र तैयार हो जाएगा। इसमें मां और पिता दोनों के आधार विवरण अनिवार्य होंगे। निजी अस्पतालों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए तुरंत जानकारी अपलोड करनी होगी, जिससे सारा डेटा केंद्रीय प्रणाली से लिंक हो सके। मृत्यु प्रमाण पत्रों में भी मृतक का आधार जोड़ा जाएगा। यह सारी प्रक्रिया जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत चलेगी, जो डिजिटल सत्यापन पर जोर देती है।
राष्ट्रीय पोर्टल से जुड़ाव
पूरे देश में चल रहे केंद्रीय रजिस्ट्रेशन सिस्टम से यह व्यवस्था सीधे जुड़ेगी। अस्पतालों को जन्म की खबर दर्ज करने पर माता-पिता का आधार डालना पड़ेगा, जिससे प्रमाण पत्र अपने आप वैरिफाई हो जाएगा। पुराने प्रमाण पत्रों को अपडेट करने के लिए संबंधित वेबसाइट पर जाकर जन्म आईडी और आधार नंबर से लिंकिंग की जा सकेगी। एक बार ओटीपी सत्यापन हो जाने के बाद दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित माना जाएगा।
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आधार को जन्म प्रमाण मानने पर रोक
पहले आधार कार्ड को उम्र साबित करने का प्रमाण माना जाता था, लेकिन अब यह प्रथा पूरी तरह बंद हो रही है। आधार में दर्ज तारीख अक्सर अनुमान पर आधारित होती है, इसलिए अब स्कूल सर्टिफिकेट या आधिकारिक जन्म दस्तावेज ही मान्य होंगे। बच्चों का बाल आधार कार्ड भी इसी नए जन्म प्रमाण पत्र से बनेगा। इससे डुप्लिकेट दस्तावेज बनाना नामुमकिन हो जाएगा।
नागरिकों को क्या फायदा
यह बदलाव स्कूल दाखिले से लेकर सरकारी लाभ तक हर कदम पर आसानी लाएगा। पेंशन, योजना लाभ और पहचान सत्यापन तेज होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जागरूकता कम है, वहां जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। डेटा में कोई गलती हो तो पहले प्रमाण पत्र सुधार लें, उसके बाद लिंकिंग करें। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे उम्र से जुड़े विवाद खत्म हो जाएंगे।
भविष्य की दिशा
उत्तर प्रदेश का यह प्रयोग पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है। डिजिटल इंडिया की सच्ची ताकत यही है कि हर दस्तावेज बायोमेट्रिक से जुड़ जाए। सरकार को अब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता सुनिश्चित करनी होगी। लाखों परिवारों को इससे लाभ मिलेगा, और फर्जीवाड़े की जड़ें कट जाएंगी। यह पारदर्शिता की नई शुरुआत है।
















