
आज के दौर में महिलाएं न केवल घर संभाल रही हैं, बल्कि उद्यमिता के नए आयाम रच रही हैं। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की नीलम कश्यप ने यही कर दिखाया। घर के महज 200 स्क्वायर फुट के छोटे से कमरे से हर्बल अगरबत्ती का बिजनेस शुरू कर एक साल में ₹25 लाख से अधिक की बिक्री हासिल की। यह कहानी मेहनत, रचनात्मकता और साहस की जीती-जागती मिसाल है, जो लाखों महिलाओं को प्रेरित कर रही है।
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नीलम की बड़ी सोच
नीलम की सफलता का राज है उनकी बड़ी सोच। वे बताती हैं, “शुरुआत में मेरे पास कुछ नहीं था- न बड़ी जगह, न भारी पूंजी। सिर्फ घर का एक कोना और ₹20,000।” उन्होंने सोचा, क्यों न इस सीमित संसाधन से घर से चलने वाला ऐसा काम शुरू किया जाए, जो बाजार की मांग पूरा करे। हर्बल अगरबत्ती बनाने का विचार आया, जो प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बनी होती है।
बाजार में केमिकल युक्त अगरबत्तियों के बीच यह पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद अलग पहचान बना गया। शुरुआत हाथ से हुई। बांस की स्टिक्स पर हर्बल पाउडर और प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल लगाकर छोटे-छोटे स्थानीय दुकानों को सप्लाई शुरू की। क्वालिटी इतनी बेहतरीन थी कि ग्राहक बार-बार ऑर्डर देने लगे।
चुनौतियों पर विजय
पहले महीनों में सब कुछ मुश्किल था। नीलम को कच्चा माल जुटाने, मिश्रण तैयार करने और सुखाने की जगह बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे प्रोडक्ट की खुशबू में अनोखे मिश्रण जोड़े- चंदन, लैवेंडर, मोगरा जैसी दुर्लभ सुगंधें। कानपुर जैसे शहर में जहां अगरबत्ती परफ्यूम विक्रेता प्रचुर हैं, नीलम का हर्बल फॉर्मूला बाजार में छा गया। मांग बढ़ी तो उन्होंने दो अन्य महिलाओं को टीम में शामिल किया। एक छोटी मशीन लगाई, जिससे उत्पादन दोगुना हो गया। आज उनका कारोबार कानपुर से निकलकर आसपास के जिलों तक फैल चुका है। हर महीने ₹2 लाख से ज्यादा की नेट इनकम हो रही है।
निवेश और मुनाफे का हिसाब
यह बिजनेस किसी के लिए भी शुरू करने लायक है। शुरुआती निवेश बेहद कम:
| मद | अनुमानित लागत (₹) |
|---|---|
| कच्चा माल (बांस स्टिक, हर्बल पाउडर, ऑयल) | 8,000 |
| पैकिंग सामग्री | 3,000 |
| बेसिक टूल्स/मशीन | 10,000 |
| कुल | 21,000 |
प्रति किलो अगरबत्ती बनाने का खर्च ₹50 के आसपास। बाजार मूल्य ₹150-200। यानी प्रति किलो ₹100-150 का शुद्ध लाभ। 200 वर्ग फुट में तीन टेबल, ड्रायिंग एरिया और पैकिंग यूनिट आसानी से फिट हो जाती है। नीलम ने Meesho, Amazon, Flipkart जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लिस्टिंग कर ऑनलाइन बिक्री बढ़ाई। “बड़ापन सोच में होता है, जगह में नहीं,” उनका मानना है।
महिलाओं का सुनहरा अवसर
घरेलू महिलाओं के लिए यह आदर्श बिजनेस है। कोई महंगा कोर्स या भारी मशीनरी नहीं चाहिए। सिर्फ नियमित मेहनत और क्रिएटिविटी से महीने के ₹30,000-50,000 कमा सकते हैं। उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाएं जैसे मुद्रा लोन या स्टैंड-अप इंडिया महिलाओं को और आसान बनाती हैं। नीलम की तरह कई महिलाएं अब पंचगव्य उत्पादों या हर्बल आइटम्स से आत्मनिर्भर हो रही हैं।
प्रेरणा की मिसाल
नीलम की यात्रा साबित करती है कि सीमाएं तो मन में होती हैं। आने वाले समय में वे अपना ब्रांड देशव्यापी बनाने की योजना बना रही हैं। ऐसी प्रेरक कहानियां समाज को नई दिशा दे रही हैं, जहां छोटे कदम बड़े सपनों को साकार कर सकते हैं।
















