
उत्तर प्रदेश में आगामी डिजिटल जनगणना को लेकर योगी सरकार ने कमर कस ली है, राज्य में मई-जून 2026 से शुरू होने जा रही इस महा-प्रक्रिया के लिए कड़े नियम और अधिसूचना जारी कर दी गई है, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी ने जनगणना के दौरान गलत जानकारी दी या कार्य में बाधा उत्पन्न की, तो उसे भारी जुर्माने के साथ जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
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इन गलतियों पर होगी सीधी कार्रवाई
जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत सरकार ने निम्नलिखित कार्यों को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है:
- भ्रामक जानकारी देना: परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, आय या व्यवसाय के बारे में जानबूझकर गलत तथ्य पेश करना।
- सवालों का जवाब न देना: जनगणना प्रगणक (Enumerator) द्वारा पूछे गए अनिवार्य सवालों के जवाब देने से इनकार करना।
- सरकारी कार्य में बाधा: गणना के लिए आए अधिकारियों को रोकने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
कितनी होगी सजा?
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 1,000 रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान है, खास बात यह है कि यह नियम केवल आम जनता पर ही नहीं, बल्कि जनगणना कार्य में लगे उन कर्मचारियों पर भी लागू होगा जो अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतेंगे।
डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित
आम जनता के मन में डेटा की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर सरकार ने साफ किया है कि जनगणना के दौरान ली गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी, अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, इस डेटा का उपयोग किसी भी अदालती कार्यवाही, पुलिस जांच या टैक्स विभाग द्वारा सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकेगा।
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परेशानी से कैसे बचें?
सजा और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित कदम उठाने की सलाह दी गई है:
- सटीक जानकारी दें: प्रगणक के घर आने पर परिवार के सभी सदस्यों और संपत्तियों की सही जानकारी साझा करें।
- सेल्फ-एन्युमरेशन (Self-Enumeration): सरकार पहली बार 7 मई से 21 मई 2026 के बीच नागरिकों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने की सुविधा दे रही है। इसका उपयोग कर आप प्रगणक के आने से पहले ही अपनी डिटेल्स भर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की यह पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप के जरिए डेटा संकलन किया जाएगा, प्रशासन ने सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करने की अपील की है।
















