
देश में रसोई गैस (LPG) की बढ़ती मांग और आपूर्ति में आ रही चुनौतियों के बीच राशन की दुकानों (Fair Price Shops) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है, ‘ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर्स फेडरेशन’ ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय को एक विस्तृत प्रस्ताव सौंपा है, इस प्रस्ताव में राशन डिपो के माध्यम से केरोसिन (मिट्टी के तेल) की आपूर्ति दोबारा शुरू करने की पुरज़ोर मांग की गई है।
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केरोसिन की वापसी की क्यों उठी मांग?
फेडरेशन का तर्क है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अस्थिर है, ऐसे में भविष्य में एलपीजी (LPG) की किल्लत की स्थिति पैदा हो सकती है, राशन डीलरों के अनुसार, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए केरोसिन एक ‘बैकअप फ्यूल’ (वैकल्पिक ईंधन) के रूप में बेहद जरुरी है, गौरतलब है कि उज्ज्वला योजना के विस्तार के बाद पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन के आवंटन में भारी कटौती की गई थी।
राशन डिपो के बदल सकते हैं नियम
PMO को भेजे गए इस प्रस्ताव में केवल केरोसिन ही नहीं, बल्कि राशन दुकानों की तस्वीर बदलने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं:
- छोटे सिलेंडरों की बिक्री: राशन दुकानों को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए वहां से 5 किलो वाले छोटे LPG सिलेंडरों की खुदरा बिक्री की अनुमति दी जा सकती है।
- वित्तीय सेवाओं का विस्तार: प्रस्ताव में राशन डीलरों को मुद्रा (MUDRA) ऋण उपलब्ध कराने और इन दुकानों को मिनी बैंकिंग सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने की बात कही गई है।
- ईंधन सुरक्षा: सरकार से आग्रह किया गया है कि आपातकालीन स्थिति के लिए राशन डिपो पर ईंधन का बफर स्टॉक रखा जाए।
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LPG वितरण के नए नियम लागू (मार्च 2026)
गैस की किल्लत और जमाखोरी की खबरों के बीच तेल कंपनियों (OMCs) ने वितरण के नियमों को और सख्त कर दिया है:
- 25 दिनों का लॉक-इन: अब दो गैस रिफिल की बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य है। यह कदम पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए उठाया गया है।
- e-KYC अनिवार्य: जिन उपभोक्ताओं ने 31 दिसंबर 2025 तक अपना e-KYC पूरा नहीं किया है, उन्हें सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो सकता है।
क्या कहती है नई नीति?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने केरोसिन आवंटन को लेकर एक नई ‘सिंगल कैटेगरी’ नीति का मसौदा तैयार किया है, इसके तहत राज्यों को अब एकमुश्त कोटा दिया जाएगा, जिसे वे अपनी स्थानीय जरूरतों (जैसे खाना पकाना, रोशनी या आपदा प्रबंधन) के अनुसार उपयोग कर सकेंगे, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PMO इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो न केवल राशन डीलरों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन सुरक्षा भी मजबूत होगी। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।
















