
डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट के बढ़ते दौर में साइबर ठगों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन अब आम आदमी की जेब पर पड़ने वाली इस मार को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है, RBI ने ‘कमर्शियल बैंक – रिस्पॉन्सिबल बिजनेस कंडक्ट (संशोधन) डायरेक्शंस, 2026’ के तहत एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है।
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क्या है मुआवजे का गणित?
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि किसी ग्राहक के साथ ₹50,000 तक की धोखाधड़ी होती है, तो वह मुआवजे का हकदार होगा।
- मुआवजे की राशि: नुकसान का 85% हिस्सा या अधिकतम ₹25,000, जो भी कम हो, ग्राहक को वापस दिया जाएगा।
- उदाहरण: अगर ₹10,000 का फ्रॉड हुआ, तो ₹8,500 वापस मिल सकते हैं, वहीं ₹40,000 के फ्रॉड पर अधिकतम सीमा यानी ₹25,000 का क्लेम मिलेगा।
जीवन में सिर्फ एक बार मिलेगा लाभ
इस स्कीम की सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि कोई भी ग्राहक अपने पूरे जीवनकाल में केवल एक बार (Once in a lifetime) ही इस मुआवजे का लाभ उठा सकेगा। इसका उद्देश्य ग्राहकों को पहली गलती के बाद अधिक सतर्क और जागरुक बनाना है।
OTP शेयर करने पर भी मिलेगा क्लेम!
अक्सर बैंक ग्राहकों की गलती (जैसे OTP बताना) होने पर मुआवजा देने से मना कर देते हैं, लेकिन इस नए प्रस्ताव में राहत दी गई है कि अगर ग्राहक ने अनजाने में OTP या क्रेडेंशियल साझा कर दिए हैं, तब भी वह इस विशेष मुआवजे के लिए पात्र हो सकता है, बशर्ते वह समय पर रिपोर्ट करे।
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क्लेम पाने के लिए क्या करना होगा?
मुआवजा पाने के लिए कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा:
- समय सीमा: धोखाधड़ी होने के 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक को सूचित करना होगा।
- दोहरी रिपोर्टिंग: बैंक के साथ-साथ नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) या पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।
- जांच: बैंक शिकायत मिलने के 30 दिनों के भीतर मामले की जांच पूरी कर मुआवजा तय करेंगे।
कब से लागू हो सकते हैं नियम?
आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर जनता और हितधारकों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे हैं, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो ये नए नियम 1 जुलाई 2026 से देशभर में प्रभावी हो सकते हैं।
















