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E20 Petrol: क्या सच में माइलेज घटा देता है नया एथेनॉल पेट्रोल? जानें सच्चाई

1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में 95 RON वाला E20 पेट्रोल अनिवार्य। सरकार का दावा: तेल आयात बचेगा, किसानों को फायदा, प्रदूषण कम। लेकिन क्या माइलेज 3-7% घटेगा? ARAI टेस्ट में 1-6% कमी, नई गाड़ियां सुरक्षित। पुरानी गाड़ियों में इंजन जोखिम? जानें विशेषज्ञ सलाह और समाधान।

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E20 Petrol: क्या सच में माइलेज घटा देता है नया एथेनॉल पेट्रोल? जानें सच्चाई

केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में 95 RON वाला E20 इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल ही बेचा जाए। 17 फरवरी को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अधिसूचना में साफ कहा गया है कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुरूप अधिकतम 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल उपलब्ध होगा, जिसका रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) कम से कम 95 होना अनिवार्य है। यह नियम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा।

सरकारी फैसला और जनता की चिंता

सरकार का दावा है कि इससे तेल आयात बिल कम होगा, किसानों को गन्ना-मक्का आधारित एथेनॉल उत्पादन से आय बढ़ेगी और प्रदूषण में कमी आएगी। लेकिन आम वाहन मालिकों के मन में एक ही सवाल घूम रहा है- क्या E20 से गाड़ियों का माइलेज सचमुच घट जाता है? सोशल मीडिया पर 15-20% तक माइलेज गिरने के दावे वायरल हैं, जबकि ARAI टेस्टिंग में केवल 1-6% की मामूली कमी दर्ज की गई।

E20 क्या है और क्यों लाया जा रहा?

E20 पेट्रोल में 80% सामान्य पेट्रोल और 20% एथेनॉल का मिश्रण होता है। एथेनॉल गन्ने या मक्का से बनाया जाता है, जो साफ और नवीकरणीय ईंधन है। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, यह CO2 उत्सर्जन को 50-65% तक घटाता है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक 20% ब्लेंडिंग हासिल करना था, जो अब अनिवार्य हो रहा है। फायदे साफ हैं- विदेशी मुद्रा बचत (लगभग 40,000 करोड़ रुपये सालाना), किसान आय दोगुनी और पर्यावरण संरक्षण। लेकिन इथेनॉल की कम कैलोरीफिक वैल्यू (ऊर्जा घनत्व) के कारण ईंधन की ताकत थोड़ी कम हो जाती है, जिससे माइलेज प्रभावित होने की चर्चा है।​

माइलेज पर कितना असर पड़ता है?

ऑटो एक्सपर्ट्स मानते हैं कि E20 से माइलेज में 3-7% की कमी आ सकती है, क्योंकि इथेनॉल की ऊर्जा पेट्रोल से 30% कम होती है। ARAI की जांच में 1-6% का अंतर पाया गया, जबकि लोकल सर्कल्स सर्वे में 80% यूजर्स ने माइलेज गिरने की शिकायत की। नई गाड़ियां (2023 के बाद लॉन्च) E20-रेडी इंजन से लैस हैं, जहां असर नगण्य है। लेकिन पुरानी गाड़ियों में 15-20% तक महसूस हो सकता है, क्योंकि इंजन ट्यूनिंग पुराने ब्लेंड (E10) के लिए है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- टायर प्रेशर चेक करें, रेगुलर सर्विसिंग कराएं और स्पार्क प्लग साफ रखें। इससे कमी को 1-2% तक सीमित किया जा सकता है।

इंजन और पुरानी गाड़ियों पर खतरा?

अप्रैल 2023 के बाद बनी कारें-बाइक पूरी तरह कंपैटिबल हैं। लेकिन 2023 से पुरानी गाड़ियों के रबर होसेस, प्लास्टिक पार्ट्स और फ्यूल सिस्टम पर लंबे समय में असर पड़ सकता है- सूजन, लीकेज या स्टार्टिंग प्रॉब्लम। रेनॉल्ट जैसी कंपनियां पुरानी मॉडल्स के लिए E20 अवॉइड करने की सलाह दे रही हैं। रॉयल एनफील्ड ने कन्वर्जन किट लॉन्च की है, जो 5,000-10,000 रुपये में उपलब्ध है। सर्वे बताते हैं कि मेंटेनेंस कॉस्ट 20-30% बढ़ गई है।

सरकार vs जनता: क्या कहते हैं आंकड़े?

तेल मंत्रालय का कहना है कि कमी ‘ना के बराबर’ है और प्रदूषण कटौती बड़े फायदे हैं। लेकिन LocalCircles सर्वे में 66% लोग चिंतित हैं, खासकर मध्यमवर्ग। कीमत पर भी बहस है- E20 की संभावित कीमत 97-106 रुपये/लीटर, लेकिन 20% सस्ता होने की मांग। विशेषज्ञों का मानना है कि ECU रीमैपिंग से परफॉर्मेंस बहाल हो सकती है।

आगे क्या? उपाय और सलाह

घबराएं नहीं! E20-रेडी गाड़ी हो तो कोई समस्या नहीं। पुरानी गाड़ी के मालिक कंपनी गाइडलाइन चेक करें, सर्विस सेंटर जाएं या कन्वर्जन किट लगवाएं। सरकार वैकल्पिक फ्यूल पर विचार करे, ताकि ट्रांजिशन सुगम हो। यह कदम पर्यावरण के लिए सही है, लेकिन उपभोक्ता हितों का ध्यान रखना जरूरी। कुल मिलाकर, माइलेज में हल्की कमी होगी, लेकिन फायदे लंबे समय तक रहेंगे। 

Author
info@nitap.in

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