लोन लेने वालों को अब बैंक इंश्योरेंस के नाम पर लूटने की छूट नहीं मिलेगी। वित्त मंत्री ने बैंकों के खिलाफ बड़ा एक्शन लेने का ऐलान किया है। लोन स्वीकृति के नाम पर ग्राहकों को अनचाहे बीमा उत्पाद बेचना अब अपराध की श्रेणी में आएगा। एक हालिया उच्च स्तरीय बैठक में वित्त मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि बैंकों को अपना मूल काम याद रखना चाहिए, जो है आसान लोन देना, न कि बीमा बेचकर कमीशन कमाना। अगर बैंक इस गुंडागर्दी को जारी रखेंगे, तो उनका लाइसेंस खतरे में पड़ सकता है। यह बदलाव लाखों आम लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो पहले लोन के लालच में ऊंची प्रीमियम वाली पॉलिसियां खरीदने को मजबूर होते थे।

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वित्त मंत्री का कड़ा रुख क्यों जरूरी था?
पिछले कई सालों से बैंकों पर ग्राहकों को लोन देने की शर्त पर बीमा थोपने के आरोप लगते रहे हैं। होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए बैंक अधिकारी दबाव बनाते थे कि बिना इंश्योरेंस के लोन मंजूर नहीं होगा। वित्त मंत्री ने इसे सीधे गुंडागर्दी करार दिया। उन्होंने बैंकों को चेताया कि मिस-सेलिंग यानी गलत तरीके से उत्पाद बेचना अब कानूनी अपराध है। इसके लिए नई गाइडलाइंस जल्द लागू होंगी, जो बैंकों पर सख्त निगरानी रखेंगी। इसका असर यह होगा कि ग्राहक बिना किसी दबाव के लोन ले सकेंगे। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम बैंकिंग सिस्टम को पारदर्शी और ग्राहक हितैषी बनाएगा।
कानूनी तौर पर इंश्योरेंस लेना जरूरी नहीं
साफ बात यह है कि किसी भी प्रकार के लोन पर बीमा लेना कभी भी अनिवार्य नहीं रहा। नियमों के मुताबिक, प्रॉपर्टी से जुड़े लोन में संपत्ति का इंश्योरेंस वैकल्पिक तौर पर लिया जा सकता है, लेकिन जीवन बीमा या पर्सनल एक्सीडेंट कवर थोपना गलत है। ग्राहक चाहें तो अपनी पसंद की कंपनी से पॉलिसी ले सकते हैं या पूरी तरह मना कर सकते हैं। बैंकों का यह दांव अक्सर कमीशन के चक्कर में होता है, जहां वे ऊंची प्रीमियम वाली पॉलिसियां बेचकर मुनाफा कमाते हैं। अब नई नीति से ग्राहकों को यह अधिकार मिलेगा कि वे बिना इंश्योरेंस के भी लोन प्राप्त कर सकें।
बैंक लाइसेंस रद्द का मतलब क्या है?
बैंक लाइसेंस रद्द होना कोई छोटी बात नहीं। यह तब होता है जब बैंक वित्तीय रूप से कमजोर हो जाते हैं या ग्राहकों के हितों की लगातार अनदेखी करते हैं। हाल के वर्षों में कई छोटे सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं। ऐसे मामलों में ग्राहकों के पैसे सुरक्षित रहते हैं, क्योंकि सरकारी बीमा स्कीम से पांच लाख तक की राशि वापस मिल जाती है। वित्त मंत्री का बयान इसी दिशा में इशारा करता है कि बार-बार शिकायतें आने पर बड़े बैंकों पर भी कार्रवाई हो सकती है। यह ग्राहकों को सशक्त बनाने का संदेश है।
ग्राहक अब क्या करें? शिकायत का आसान तरीका
अगर बैंक दबाव बनाए, तो घबराएं नहीं। यहां बताया जा रहा है शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया:
- सबसे पहले बैंक के ब्रांच मैनेजर से लिखित शिकायत करें।
- संतुष्टि न मिले तो बैंक के नोडल ऑफिसर को ईमेल या लेटर भेजें।
- अगला कदम रिजर्व बैंक की Sachet पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना।
- अगर फिर भी समाधान न हो, तो बैंकिंग ओम्बड्समैन के पास अपील करें।
- सभी दस्तावेज, जैसे लोन एग्रीमेंट और बातचीत के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।
इस प्रक्रिया से मिस-सेलिंग साबित होने पर इंश्योरेंस रद्द हो जाएगा और प्रीमियम रिफंड भी मिलेगा। लोन लेते समय दस्तावेज ध्यान से पढ़ें और जबरदस्ती का विरोध करें।
यह नया बदलाव बैंकिंग को उसके असली रास्ते पर लाएगा। ग्राहकों की जेब पर अनावश्यक बोझ कम होगा और लोन प्रक्रिया सरल बनेगी। वित्त मंत्री का यह फैसला आम आदमी की जीत है।
















