ग्रामीण इलाकों की मेहनती महिलाओं के चेहरे पर अब मुस्कान लौटने वाली है। केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल से अब आर्थिक रूप से कमजोर बहनें घर से ही अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। सिलाई मशीन जैसा उपयोगी उपकरण मुफ्त में उपलब्ध कराने वाली यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान देगी।
यह प्रयास पारंपरिक कौशलों को मजबूत करने पर केंद्रित है। महिलाएं जो पहले मजदूरी या छोटे-मोटे कामों पर निर्भर रहीं, अब अपनी कला से परिवार का पालन-पोषण कर सकेंगी। योजना के जरिए न सिर्फ उपकरण मिलेगा, बल्कि प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता भी सुनिश्चित होगी। इससे घरेलू आय में इजाफा होगा और समाज में महिलाओं की भूमिका मजबूत बनेगी।

Table of Contents
योजना की शुरुआत और लक्ष्य
केंद्र सरकार ने पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की। इसका फोकस उन महिलाओं पर है जो सिलाई का बुनियादी ज्ञान रखती हैं। योजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाली सिलाई मशीन उपलब्ध कराई जाती है, जिसकी कीमत करीब पंद्रह हजार रुपये है। यह राशि सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित होती है, ताकि महिला अपनी पसंद का उपकरण खरीद सके।
इसके साथ ही पांच से पंद्रह दिनों का मुफ्त प्रशिक्षण भी दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन पांच सौ रुपये का भत्ता मिलता है, जो महिलाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन है। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है, जो आगे चलकर ऋण प्राप्ति में सहायक होता है। कुल मिलाकर यह योजना महिलाओं को शुरुआती पूंजी से लेकर बाजार तक की सुविधा देती है।
कौन ले सकता है लाभ?
यह अवसर मुख्य रूप से अठारह से चालीस वर्ष की आयु वाली महिलाओं के लिए है। गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार, विधवाएं, परित्यक्ताएं और ग्रामीण क्षेत्रों की बहनें इसमें प्राथमिकता पाती हैं। आवेदिका को सिलाई का प्रारंभिक कौशल होना अनिवार्य है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है।
आवश्यक कागजातों में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड या आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो, पासपोर्ट साइज फोटो और सक्रिय मोबाइल नंबर शामिल हैं। पहले श्रम पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी होता है। यह प्रक्रिया पारदर्शी रखी गई है, ताकि सही लाभार्थी तक सहायता पहुंचे।
आसान आवेदन प्रक्रिया
आवेदन पूरी तरह डिजिटल रूप से किया जा सकता है। सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आधार या जन आधार से पंजीकरण करें। व्यक्तिगत जानकारी भरें और व्यवसाय के रूप में दर्जी या टेलरिंग का विकल्प चुनें। सभी दस्तावेज स्कैन करके अपलोड करें। इसके बाद नजदीकी सामान्य सेवा केंद्र या पंचायत कार्यालय में जाकर बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा करें।
प्रक्रिया में चार से छह सप्ताह लग सकते हैं। सत्यापन के बाद ई-वाउचर जारी हो जाता है, जिससे मशीन खरीदी जा सकती है। यदि ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई हो, तो स्थानीय सेवा केंद्र पर सहायता लें। आवेदन रसीद को सुरक्षित रखें, क्योंकि यह आगे की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे की संभावनाएं और प्रभाव
प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को कम ब्याज पर एक से तीन लाख तक का ऋण उपलब्ध होता है। इससे वे अपना कार्य विस्तार दे सकती हैं, जैसे डिजाइनर सिलाई या बुटीक शुरू करना। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे बेरोजगारी घटेगी और परिवार की मासिक आय दस से पंद्रह हजार रुपये तक पहुंच सकती है।
पिछले वर्षों में हजारों महिलाओं ने इस योजना से लाभ उठाया। पंजाब जैसे राज्यों में ग्रामीण बहनें अब स्वावलंबी बन रही हैं। यह न केवल आर्थिक मजबूती देती है, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण भी लाती है। सरकार का लक्ष्य लाखों कारीगरों को जोड़ना है। योग्य महिलाओं को तुरंत आवेदन करना चाहिए। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का सशक्त माध्यम साबित हो रही है।












