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Gold vs Silver 2026: डॉलर की मजबूती भी नहीं रोक पाएगी चमक, अगले साल चांदी पर भारी पड़ेगा सोना!

मंगलवार को मजबूत डॉलर से सोना 1.5% गिरकर $5,150/औंस और चांदी 3% टूटकर $85/औंस पर। फिर भी, भू-राजनीतिक तनाव, ट्रंप टैरिफ और फेड की ढीली नीतियां सहारा देंगी। विशेषज्ञ: सोना $6,100-6,700, चांदी $175-220 तक 2026 में। कमजोर औद्योगिक मांग से चांदी पिछड़ सकती है, सोना सुरक्षित हेज बनेगा। भारत में MCX सोना ₹1.6L, चांदी ₹3.25L का लक्ष्य।

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Gold vs Silver 2026: डॉलर की मजबूती भी नहीं रोक पाएगी चमक, अगले साल चांदी पर भारी पड़ेगा सोना!

मंगलवार को मजबूत अमेरिकी डॉलर के दबाव में कीमती धातुओं पर भारी गिरावट देखी गई। स्पॉट गोल्ड करीब 1.5 प्रतिशत फिसलकर 5,150 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 3 प्रतिशत से अधिक टूटकर 85 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इससे पहले सोना तीन हफ्तों के उच्चतम स्तर 5,250 डॉलर तक छू चुका था। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है और व्यापक रुझान कीमती धातुओं के पक्ष में बना हुआ है। जेपी मॉर्गन जैसे संस्थानों ने लंबी अवधि में सोने के दाम 4,500 डॉलर से ऊपर रहने का अनुमान जताया है।

हालिया गिरावट का जायजा

भू-राजनीतिक तनाव और ट्रंप के टैरिफ ऐलान ने वैश्विक बाजारों में बेचैनी बढ़ा दी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट के शुल्क फैसले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 प्रतिशत नए टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जिसे 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की चेतावनी भी दी। इससे वैश्विक व्यापार अस्थिर हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी अनिश्चितता में निवेशक सोने की सुरक्षित शरण की ओर रुख करते हैं।

ग्लोबलडेटा के पूर्वानुमान में 2026 के अंत तक सोना 6,100-6,700 डॉलर और चांदी 175-220 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। भारत में MCX पर सोना 1,60,000-1,65,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,25,000-3,50,000 रुपये प्रति किलो का लक्ष्य है।

फेड की नीतियां सहारा

फेडरल रिजर्व की ढीली मौद्रिक नीति भी सहारा दे रही है। हाल के रिवर्स रेपो उपायों से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ी है, जिससे कीमती धातुओं में निवेश का प्रवाह तेज हुआ। टैरिफ अनिश्चितता के बीच कम ब्याज दरों की उम्मीद सोने को मजबूत रखेगी। विश्लेषकों का अनुमान है कि सोने में 3-4 प्रतिशत और चांदी में 7-8 प्रतिशत अतिरिक्त तेजी आ सकती है। हालांकि, बैंक ऑफ अमेरिका के अनुसार, सोना 2026 का प्राथमिक हेज रहेगा, जबकि चांदी 135-309 डॉलर के बीच टॉप आउट कर सकती है।

चांदी की कमजोरी क्यों?

चांदी की रैली मुख्यतः निवेश प्रवाह और चीन की खरीदारी से प्रेरित है, न कि घरेलू औद्योगिक मांग से। मुंबई के फिजिकल मार्केट में चांदी MCX वायदे से 1,000 रुपये डिस्काउंट पर बिक रही है, जो कमजोर मांग का संकेत है। सोना कम जोखिम वाला और स्थिर है, जबकि चांदी की वृद्धि क्षमता अधिक (87-135%) लेकिन अस्थिरता भी ज्यादा। गोल्ड-सिल्वर रेशियो के संकुचन से चांदी बेहतर कर सकती है, पर अनिश्चितता में सोना निवेशकों का भरोसा जीतेगा। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में 2026 में दोनों धातुओं की तेजी की भविष्यवाणी है, लेकिन सोना आगे रहेगा।

धातुअपेक्षित वृद्धि (%)मुख्य ड्राइवरजोखिम स्तर
सोना30-45सेंट्रल बैंक खरीदारी, सुरक्षित मांगकम
चांदी87-135औद्योगिक (सोलर, EV), निवेशमध्यम-उच्च

निवेश रणनीति

निवेशकों को सलाह है कि सुधार पर सोना खरीदें (1,70,000-1,78,000 रुपये के आसपास)। रूढ़िगत पोर्टफोलियो के लिए सोना बेहतर, जबकि आक्रामक निवेशक चांदी चुनें। दोनों का मिश्रण संतुलित रिटर्न देगा। हालांकि, बाजार जोखिमों का आकलन जरूरी है। 2026 में डॉलर की मजबूती के बावजूद सोने की चमक बरकरार रहेगी। 

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info@nitap.in

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