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किराएदार ध्यान दें! क्या आपका मकान मालिक हर साल मनमर्जी से बढ़ा देता है किराया? जान लें ये नियम, वरना हो सकते हैं ठगी के शिकार

हर साल किराया बढ़ाने का नियम क्या है? जानें कानूनी हदें वरना ठगे जाएंगे। आसान नियम फॉलो करें और अपना हक बचाएं।

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अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और मकान मालिक हर साल बिना वजह किराया बढ़ाने की कोशिश करता है, तो अब चिंता न करें। नए किरायेदारी नियमों ने मकान मालिकों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। ये बदलाव किराएदारों को आर्थिक सुरक्षा देते हुए पारदर्शिता ला रहे हैं, खासकर पंजाब जैसे राज्यों में जहां प्रवासी मजदूरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लाखों परिवार अब अनुचित शोषण से बच सकेंगे।

किराएदार ध्यान दें! क्या आपका मकान मालिक हर साल मनमर्जी से बढ़ा देता है किराया? जान लें ये नियम, वरना हो सकते हैं ठगी के शिकार

नए नियमों का आधार

किरायेदारी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। हर किराया समझौता लिखित रूप में होना चाहिए, जिसमें बढ़ोतरी की शर्तें पहले से तय हों। बिना सहमति या पूर्व सूचना के कोई बदलाव मान्य नहीं। साल भर में सिर्फ एक बार ही किराया बढ़ाया जा सकता है, वो भी सीमित प्रतिशत में। इससे अचानक 20-30 फीसदी की हाइक जैसी पुरानी प्रथा खत्म हो गई। मकान मालिक को कम से कम डेढ़ से तीन महीने पहले लिखित नोटिस देना पड़ता है, ताकि किरायेदार अपनी योजना बना सकें।

कितना बढ़ सकता है किराया?

आम तौर पर सालाना पांच से दस फीसदी तक की बढ़ोतरी की अनुमति है, जो महंगाई दर पर आधारित होती है। उदाहरण लें तो दस हजार रुपये मासिक किराए पर अगले साल अधिकतम आठ सौ से एक हजार रुपये ही जुड़ सकते हैं। अगर मकान में बड़ा रखरखाव हुआ हो, तो थोड़ा अतिरिक्त जोड़ा जा सकता है, लेकिन कुल सीमा पार नहीं। पंजाब और लुधियाना जैसे शहरों में स्थानीय नियम पांच से आठ फीसदी तक सीमित रखते हैं। बिना नोटिस या तय सीमा से बाहर बढ़ोतरी पर किरायेदार ट्रिब्यूनल जा सकता है, जहां तेजी से फैसला सुनाया जाता है।

पंजाब में स्थानीय प्रावधान

पंजाब के औद्योगिक केंद्र लुधियाना में ये नियम खासतौर पर उपयोगी हैं। यहां मकान मालिक को बाजार मूल्य या मरम्मत खर्च साबित करना पड़ता है। सुरक्षा जमा दो महीने से ज्यादा नहीं मांगा जा सकता। समझौता डिजिटल रजिस्ट्रेशन और आधार से जुड़ा होना चाहिए। बेदखली सिर्फ गंभीर उल्लंघन जैसे दो महीने किराया न चुकाने पर ही मुमकिन। स्थानीय विशेषज्ञ कहते हैं कि इन नियमों से छोटे विवाद सुलझने लगे हैं और कोर्ट के चक्कर कम हो रहे हैं।

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राज्यवार अंतर

विभिन्न राज्यों में थोड़ी भिन्नता है। दिल्ली जैसे शहरों में सात फीसदी तक सीमा है, जबकि मुंबई चार फीसदी पर अंकुश। हर जगह नोटिस पीरियड एक से तीन महीने का। ये विविधता मॉडल कानून पर आधारित है, जो सभी राज्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

किरायेदारों के लिए सलाह

किराया समझौता लेते वक्त सभी शर्तें पढ़ें और रजिस्टर करवाएं। अनुचित बढ़ोतरी पर स्थानीय रेंट अथॉरिटी से तुरंत संपर्क करें। छोटी मरम्मत खुद कर खर्च काट सकते हैं, लेकिन बड़ी के लिए सूचना दें। डिजिटल प्लेटफॉर्म से समझौता बनवाएं और टीडीएस नियमों का पालन सुनिश्चित करें। इन कदमों से न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि तनाव मुक्त जीवन मिलेगा।

भविष्य की उम्मीदें

ये नियम किराएदारों को सशक्त बना रहे हैं, साथ ही मकान मालिकों को स्पष्टता दे रहे हैं। लंबे समय में इससे आवास बाजार स्थिर होगा। लुधियाना के किराएदार अब अपने अधिकार जानते हैं, अपने हक के लिए खड़े हों। 

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info@nitap.in

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