
बदलते दौर में जहां बैंकिंग से लेकर ऑफिस के काम तक सब कुछ ईमेल पर निर्भर है, वहीं साइबर अपराधी अब ‘ईमेल स्पूफिंग’ (Email Spoofing) को हथियार बनाकर लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगा रहे हैं, स्पूफिंग एक ऐसी चाल है जिसमें जालसाज प्रेषक (Sender) की पहचान छिपाकर आपको ऐसा ईमेल भेजते हैं जो बिल्कुल आपकी बैंक या किसी जानी-मानी कंपनी जैसा दिखता है।
Table of Contents
स्पूफिंग ट्रिक: आंखों के सामने होता है धोखा
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्पूफिंग में अपराधी ईमेल के ‘हेडर’ को बदल देते हैं। उदाहरण के तौर पर, आपको लगेगा कि मेल support@yourbank.com से आया है, लेकिन असल में उसका सोर्स कुछ और ही होता है, इसका मकसद आपका भरोसा जीतकर आपसे पासवर्ड, ओटीपी या वित्तीय जानकारी हासिल करना होता है।
इन 5 संकेतों से पहचानें ‘नकली ईमेल’
- डोमेन नेम की बारीकी: स्कैमर्स असली डोमेन से मिलते-जुलते नाम का उपयोग करते हैं, जैसे
google.comकी जगहg00gle.comयाinfo-google.comहोना। - डराने वाली भाषा: नकली ईमेल अक्सर “आपका खाता ब्लॉक कर दिया गया है” या “24 घंटे में केवाईसी (KYC) करें वरना पेनाल्टी लगेगी” जैसी धमकियां देकर आपको जल्दबाजी में फैसला लेने पर मजबूर करते हैं।
- अनजान लिंक और अटैचमेंट: ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से पहले कर्सर को उस पर ले जाएं (Hover करें)। यदि नीचे दिख रहा URL ईमेल के विषय से मेल नहीं खाता, तो यह खतरा हो सकता है।
- सामान्य संबोधन: बैंक हमेशा आपका नाम लेकर संबोधित करते हैं। यदि ईमेल में “प्रिय ग्राहक” (Dear Customer) या “वैल्यूड यूजर” लिखा है, तो सतर्क हो जाएं।
- व्याकरण की गलतियां: नामी कंपनियों के ईमेल प्रोफेशनल होते हैं। स्पेलिंग मिस्टेक या खराब ग्रामर वाले ईमेल अक्सर फेक होते हैं।
धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह है कि कभी भी ईमेल पर अपना पिन, ओटीपी या पासवर्ड साझा न करें, यदि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो बिना देरी किए भारत सरकार के National Cyber Crime Reporting Portal पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, आप तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी राशि को फ्रीज कराने की कोशिश कर सकते हैं।
















