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अग्निवीर भर्ती: नेपाली गोरखाओं के लिए बंद हुए भारतीय सेना के दरवाजे? नई भर्ती नोटिफिकेशन में नहीं हैं नेपाली गोर्खा

भारतीय सेना में दशकों से अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले नेपाली गोरखाओं के भविष्य पर अब सवालिया निशान लग गया है, हाल ही में जारी भारतीय सेना अग्निवीर भर्ती 2026 अधिसूचना में 'नेपाली गोरखा' का कॉलम न होने से कूटनीतिक और सैन्य गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है

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अग्निवीर भर्ती: नेपाली गोरखाओं के लिए बंद हुए भारतीय सेना के दरवाजे? नई भर्ती नोटिफिकेशन में नहीं हैं नेपाली गोर्खा
अग्निवीर भर्ती: नेपाली गोरखाओं के लिए बंद हुए भारतीय सेना के दरवाजे? नई भर्ती नोटिफिकेशन में नहीं हैं नेपाली गोर्खा

भारतीय सेना में दशकों से अपनी बहादुरी का लोहा मनवाने वाले नेपाली गोरखाओं के भविष्य पर अब सवालिया निशान लग गया है, हाल ही में जारी भारतीय सेना अग्निवीर भर्ती 2026 अधिसूचना में ‘नेपाली गोरखा’ का कॉलम न होने से कूटनीतिक और सैन्य गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। 

नोटिफिकेशन में बड़ा बदलाव: ‘भारतीय गोरखा’ ही पात्र

ताजा अपडेट के अनुसार, सेना की नई भर्ती अधिसूचना में केवल ‘भारतीय गोरखा’ (Indian Gorkhas) का विकल्प दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि केवल भारत के नागरिक गोरखा युवा ही अब अग्निवीर के रूप में आवेदन कर सकते हैं। नेपाल के नागरिक गोरखाओं के लिए फिलहाल आवेदन का कोई रास्ता नहीं बचा है। 

आखिर क्यों रुका नेपाल-मूल के गोरखाओं का प्रवेश?

यह गतिरोध जून 2022 में अग्निपथ योजना के लागू होने के बाद से बना हुआ है। मुख्य विवाद के बिंदु निम्नलिखित हैं: 

  • पेंशन और सेवा की अवधि: नेपाल सरकार को आपत्ति है कि 4 साल की अल्पकालिक सेवा और पेंशन न मिलने का प्रावधान 1947 के त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite Agreement) का उल्लंघन है।
  • भविष्य की असुरक्षा: नेपाल का मानना है कि 21 साल की उम्र में सेना से बाहर होने वाले युवाओं के पास भविष्य के लिए कोई ठोस योजना नहीं होगी।
  • पड़ोसी देश की चुप्पी: भारत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की सभी भर्तियां केवल अग्निवीर योजना के तहत ही होंगी, जबकि नेपाल पुराने नियमों (स्थायी सेवा) के तहत ही भर्ती चाहता है। 

भारतीय गोरखाओं के लिए बढ़े अवसर 

भले ही नेपाली गोरखाओं की भर्ती रुकी हुई है, लेकिन इससे उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग) और सिक्किम जैसे क्षेत्रों के भारतीय गोरखा युवाओं के लिए रिक्तियां बढ़ गई हैं। सेना के पास वर्तमान में लगभग 42,000 गोरखा जवान हैं, लेकिन 2020 के बाद से नेपाली गोरखाओं की कोई नई यूनिट शामिल नहीं हुई है। 

सेना पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा चला, तो भारतीय सेना की प्रसिद्ध गोरखा रेजिमेंट का स्वरूप बदल सकता है, फिलहाल, भारतीय सेना और सरकार नेपाल के साथ कूटनीतिक संवाद के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन आधिकारिक वेबसाइट joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध नई सूचनाएं फिलहाल नेपाली युवाओं के लिए राहत भरी नहीं हैं। 

Agniveer Recruitment India Delivers Blow to Neighbor Doors Closed for Nepali Gurkhas in Agniveer Recruitment
Author
info@nitap.in

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