
देश के पेट्रोल पंप मालिकों के लिए बड़ी खबर है, सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL और HPCL) ने अपनी पेमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए ‘एडवांस पेमेंट’ (अग्रिम भुगतान) का नियम लागू कर दिया है, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और कंपनियों को हो रहे वित्तीय घाटे के बीच उठाए गए इस कदम ने देशभर के करीब 1 लाख पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ा दी है।
Table of Contents
क्या है नया नियम?
अब तक पेट्रोल पंप डीलरों को तेल कंपनियों से शॉर्ट-टर्म क्रेडिट (उधार) की सुविधा मिलती थी, जिसमें तेल पहले मिलता था और भुगतान बाद में किया जाता था, अब इस क्रेडिट सुविधा को बंद कर ‘कैश एंड कैरी’ मॉडल लागू कर दिया गया है। यानी अब डीलरों को तेल की सप्लाई के लिए पहले ही भुगतान करना होगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
- कंपनियों का घाटा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर हैं। इसके चलते तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹20 और डीजल पर ₹45 प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है।
- वैश्विक संकट: मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने की आशंका से तेल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
- कीमतों में स्थिरता: फिलहाल सरकार ने रिटेल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे आम आदमी को तात्कालिक राहत है।
- सप्लाई में संभावित कमी: ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि एडवांस पेमेंट की वजह से छोटे पंप मालिकों के पास फंड की कमी हो सकती है, जिससे कुछ इलाकों में स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति बन सकती है।
- अफवाहों से बचें: सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है ग्राहकों को घबराकर ‘पैनिक बाइंग’ न करने की सलाह दी गई है।
- खुले में तेल पर रोक: सुरक्षा कारणों से अब बोतलों या खुले डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर सख्त पाबंदी लगा दी गई है।
1 अप्रैल 2026 से लागू होगा एक और बड़ा बदलाव
सरकार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से पूरे भारत में केवल E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल मिश्रित) की ही बिक्री अनिवार्य होगी, इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण पर लगाम लगाना है।
















