Join Contact

Diabetes Tips: शुगर मरीजों को कब पड़ती है इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत? आसान भाषा में समझें यह शरीर में कैसे करता है काम

डायबिटीज का बढ़ता संकट: इंसुलिन इंजेक्शन कब जरूरी? भारत में 21 करोड़ मरीज जूझ रहे हैं इस महामारी से। टाइप-1 में जीवनभर, टाइप-2 में HbA1c>8% या दवाओं से कंट्रोल न होने पर इंजेक्शन जरूरी। यह ग्लूकोज को कोशिकाओं में भेजकर शुगर कंट्रोल करता है। सावधानी: जगह बदलें, नई सुई इस्तेमाल करें। डॉक्टर सलाह लें।

Published On:
Diabetes Tips: शुगर मरीजों को कब पड़ती है इंसुलिन इंजेक्शन की जरूरत? आसान भाषा में समझें यह शरीर में कैसे करता है काम

डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से फैल रही गंभीर बीमारी बन चुकी है, खासकर भारत में जहां 2026 तक 21 करोड़ से ज्यादा लोग इससे जूझ रहे हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ब्लड शुगर लेवल लगातार ऊंचा रहे तो किडनी, आंखें, हृदय और यहां तक कि दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। हाल ही में अमर उजाला की रिपोर्ट ने बताया कि हाई शुगर से डिमेंशिया और हाथों की नसों की समस्या भी बढ़ रही है।​

डायबिटीज का वैश्विक और भारतीय खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन और आईडीएफ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में दुनिया में 58 करोड़ वयस्क डायबिटीज से प्रभावित थे, जो 2050 तक 85 करोड़ तक पहुंच सकता है। भारत दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है, जहां चीन के बाद 9 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं। नेचर जर्नल की 2026 रिपोर्ट कहती है कि यह महामारी भारत की अर्थव्यवस्था पर 946 लाख करोड़ रुपये का बोझ डालेगी। युवाओं में भी केस बढ़ रहे हैं, क्योंकि शहरीकरण, गलत खान-पान और कम एक्सरसाइज मुख्य वजहें हैं।

डायबिटीज धीरे-धीरे शरीर को खोखला कर देती है। टाइप-1 में पैंक्रियास इंसुलिन बनाना बंद कर देता है, जबकि टाइप-2 में इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता। अगर समय पर कंट्रोल न हो तो स्ट्रोक, हार्ट अटैक या किडनी फेलियर जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए कम उम्र से ही जांच और सतर्कता जरूरी है।

इंसुलिन इंजेक्शन क्या है और कब है जरूरत?

इंसुलिन एक महत्वपूर्ण हार्मोन है जो पैंक्रियास बनाता है। यह खून के ग्लूकोज को कोशिकाओं में भेजकर ऊर्जा बनाता है। जब शरीर खुद पर्याप्त इंसुलिन न बना पाए या दवाएं असर न करें, तब इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है।

एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. आमिर शेख जैसे विशेषज्ञ बताते हैं कि टाइप-1 डायबिटीज में सभी मरीजों को जीवनभर इंसुलिन लेना पड़ता है, क्योंकि इम्यून सिस्टम पैंक्रियास की बीटा कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। टाइप-2 में शुरू में दवाएं, डाइट और व्यायाम से कंट्रोल होता है, लेकिन HbA1c 7-8% से ऊपर रहने, फास्टिंग शुगर 200 mg/dL से ज्यादा होने या प्रेग्नेंसी में डायबिटीज पर डॉक्टर इंसुलिन शुरू करते हैं। सर्जरी, इंफेक्शन या किडनी-लिवर समस्याओं में भी यह सुरक्षित विकल्प है।

स्थितिइंसुलिन कब जरूरी?उदाहरण
टाइप-1हमेशा, जन्मजात कमीसभी बच्चे/युवा मरीज 
टाइप-2दवाओं से कंट्रोल न होHbA1c >8%, शुगर >250 mg/dL 
विशेष केसगर्भावस्था, सर्जरीजीस्ट्रेशनल डायबिटीज 

इंसुलिन कैसे काम करता है?

इंसुलिन इंजेक्शन प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करता है। यह त्वचा के नीचे (पेट, जांघ या कूल्हों में) इंजेक्ट किया जाता है, जहां से ब्लडस्ट्रीम में जाकर ग्लूकोज को कोशिकाओं में पहुंचाता है। इससे ब्लड शुगर कम होता है, लिवर अतिरिक्त शुगर बनाने बंद कर देता है और कोशिकाएं ऊर्जा पाती हैं। बिना इसके शुगर ब्लड में जमा होकर जटिलताएं पैदा करता है।

प्रकार:

  • फास्ट-एक्टिंग: खाने के बाद तुरंत, 15 मिनट में असर।​
  • लॉन्ग-एक्टिंग: दिनभर स्थिर शुगर के लिए, 1-2 बार।

डोज मरीज की शुगर प्रोफाइल पर निर्भर करती है। टाइप-2 के 30% मरीजों को लंबे समय तक लेना पड़ता है।

सावधानियां और साइड इफेक्ट्स

इंजेक्शन लगाते समय एक ही जगह न लगाएं, वरना लिपोहाइपरट्रॉफी (गांठ) हो सकती है। नई सुई हर बार इस्तेमाल करें, संक्रमण से बचें। चोट वाली जगह, नाभि के आसपास 2 इंच दूर या सख्त त्वचा पर न लगाएं। वायल को फ्रिज में न रखें, कमरे के तीमार पर स्टोर करें और धूप से बचाएं।डॉक्टर की सलाह बिना कभी डोज न बदलें। हाइपोग्लाइसीमिया (कम शुगर) का खतरा रहता है, इसलिए ग्लूकोमीटर से नियमित चेक करें।

जागरूकता ही बचाव

डायबिटीज से निपटने के लिए इंसुलिन जीवनरक्षक है, लेकिन लाइफस्टाइल बदलाव पहला कदम है। स्वस्थ आहार, व्यायाम और नियमित जांच से इसे रोका जा सकता है। भारत जैसे देश में जहां मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, सरकार और समाज को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने होंगे।

Author
info@nitap.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार