सड़कों पर तेज रफ्तार से गुजरते वाहनों की नंबर प्लेटें सिर्फ नंबर ही नहीं, बल्कि एक पूरी कहानी कहती हैं। हर रंग वाहन के मालिक, उसके उपयोग और विशेषाधिकारों को दूर से ही बयां कर देता है। ये व्यवस्था ट्रैफिक प्रबंधन को सरल बनाती है और नियमों का पालन सुनिश्चित करती है। गलत प्लेट का इस्तेमाल महंगा पड़ सकता है, जिसमें भारी जुर्माना या वाहन जब्ती शामिल है। आइए जानते हैं इन रंगों के पीछे की सच्चाई को करीब से।

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निजी वाहनों का सफेद चिन्ह
सफेद पृष्ठभूमि पर काले अक्षरों वाली प्लेट आम नागरिकों की पसंदीदा है। यह निजी कारों, मोटरसाइकिलों और SUVs पर लगती है, जो केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए होती हैं। व्यावसायिक काम में इनका इस्तेमाल प्रतिबंधित है। इन वाहनों पर कर कम लगता है और रखरखाव आसान रहता है। लाखों परिवार इन्हीं पर निर्भर हैं, जो शहरों की सड़कों को जीवंत बनाते हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर तत्काल चालान होता है।
व्यावसायिक गाड़ियों की पीली मार्किंग
पीले रंग की प्लेट काले अक्षरों संग व्यावसायिक वाहनों की पहचान है। टैक्सी, बसें, ट्रक और रिक्शे इन्हें धारण करते हैं। इससे पता चलता है कि वाहन से आय हो रही है। इन पर सख्त निगरानी रहती है: अधिक कर, नियमित जांच और प्रदूषण प्रमाणपत्र अनिवार्य। पंजाब जैसे क्षेत्रों में ये अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, लेकिन ओवरलोडिंग या तेज गति पर कड़ी कार्रवाई होती है। ड्राइवरों को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है।
हरी प्लेट से इलेक्ट्रिक क्रांति
हरित ऊर्जा के दौर में हरी प्लेट इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रतीक बनी है। निजी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर सफेद अक्षर जबकि व्यावसायिक पर पीले अक्षर होते हैं। टाटा और ओला जैसे ब्रांडों की ये गाड़ियां लोकप्रिय हो रही हैं। इनके फायदे अपार: कर में छूट, चार्जिंग स्टेशन पर प्राथमिकता और आसान पार्किंग। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ये प्रोत्साहित की जा रही हैं। नकली प्लेट का दुरुपयोग रोकने के लिए सतत नजर रखी जाती है।
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विशेषाधिकार वाली अन्य प्लेटें
लाल प्लेट उच्च पदाधिकारियों या परीक्षण वाहनों के लिए आरक्षित है, जिसमें विशेष चिन्ह जुड़ा होता है। नीली प्लेट विदेशी राजनयिकों की गाड़ियों पर दिखती है, जो उन्हें विशेष छूट देती है। कभी-कभी काली या अन्य रंग विशेष श्रेणियों में आते हैं। नवीनतम हाइड्रोजन वाहनों के लिए हरा-नीला संयोजन प्रस्तावित है। अस्थायी पंजीकरण के लिए अलग डिजाइन होता है। ये सभी सामान्य जनता से अलग रखे जाते हैं।
नियमों की सख्ती और सावधानियां
केंद्रीय मोटर वाहन कानून इन रंगों को बांधे हुए हैं। गलत प्लेट लगाना अपराध माना जाता है, जिसमें पांच हजार से दस हजार तक जुर्माना लग सकता है। उच्च सुरक्षा वाली चिपयुक्त प्लेटें अनिवार्य हैं, जो चोरी या नकली रोकती हैं। शहरों में कैमरों से निगरानी तेज है। सुझाव है कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से प्रमाणित प्लेट ही लगवाएं। समय-समय पर जांच करवाएं ताकि परेशानी न हो।
ये रंग न केवल व्यवस्था लाते हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करते हैं। जागरूक चालक ही हादसों को कम कर सकते हैं। सतर्क रहें, सुरक्षित चलें।
















