
बार-बार पेट फूलना या ब्लोटिंग आजकल एक आम शिकायत बन गई है। ज्यादातर लोग इसे गैस, एसिडिटी या ज्यादा खाने का नतीजा मानकर दवा खा लेते हैं या घरेलू नुस्खों से काम चला लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह समस्या हफ्तों तक बनी रहे, खासकर दर्द या अन्य लक्षणों के साथ, तो यह सिर्फ मामूली पाचन समस्या नहीं हो सकती। यह IBS, फूड इंटॉलरेंस, लिवर सिरोसिस या यहां तक कि आंतों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
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ब्लोटिंग: सामान्य या खतरे की घंटी?
पेट फूलना तब होता है जब आंतों में गैस जमा हो जाती है या पाचन प्रक्रिया बाधित हो जाती है। सामान्य कारणों में मसालेदार भोजन, जल्दी खाना, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स या कब्ज शामिल हैं। ये लक्षण थोड़ी देर में खुद ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर बिना वजह रोजाना ब्लोटिंग हो, पेट भारी लगे या खाना खाते ही फूलाव शुरू हो जाए, तो सतर्क हो जाना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, यह हार्मोनल असंतुलन जैसे थायरॉयड या पीएमएस से भी जुड़ा हो सकता है।
मिसाल के तौर पर, लैक्टोज इंटॉलरेंस वाले लोगों में दूध पीने के तुरंत बाद गैस और ब्लोटिंग होती है, क्योंकि शरीर लैक्टोज को पचा नहीं पाता। इसी तरह, ग्लूटेन सेंसिटिविटी या सीलियक डिजीज में गेहूं खाने से आंतें सूज जाती हैं।
गंभीर कारण जो नजरअंदाज करने लायक नहीं
बार-बार ब्लोटिंग कई बार इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) का लक्षण होती है। इसमें पेट दर्द, कभी दस्त तो कभी कब्ज, और भारीपन महसूस होता है। तनाव IBS को और बढ़ाता है। फिर स्मॉल इंटेस्टाइनल बैक्टीरियल ओवरग्रोथ (SIBO) में आंतों के बैक्टीरिया असंतुलित हो जाते हैं, जो खाने को फर्मेंट करके गैस पैदा करते हैं।
अधिक चिंताजनक हैं इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसे क्रोहन डिजीज या अल्सरेटिव कोलाइटिस। इनमें सूजन पुरानी होती है, मल में खून आ सकता है। लिवर सिरोसिस में फ्लूइड जमा होने से पेट फूलता है। सबसे गंभीर मामला आंतों के कैंसर का है, जहां शुरुआती स्टेज में ब्लोटिंग ही मुख्य संकेत होता है। विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार ब्लोटिंग को इग्नोर करने से बीमारी एडवांस हो सकती है।
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें?
सभी ब्लोटिंग खतरनाक नहीं होती, लेकिन कुछ चेतावनी संकेतों पर तुरंत ध्यान दें:
| लक्षण | संभावित खतरा | कब डॉक्टर जाएं? |
|---|---|---|
| वजन अचानक घटना | कैंसर या पोषण कमी | 1-2 हफ्ते में |
| मल में खून या काला मल | अल्सर/कैंसर | तुरंत |
| लगातार दर्द/उल्टी | IBS/IBD | 3-4 दिन बाद |
| थकान/एनीमिया | आंतरिक रक्तस्राव | 1 हफ्ता |
| पेट का आकार बढ़ना | लिवर समस्या | तुरंत जांच |
अगर रात में नींद टूट रही हो या बुखार साथ हो, तो इमरजेंसी है। महिलाओं में पीरियड्स के दौरान ब्लोटिंग सामान्य है, लेकिन लगातार बनी रहे तो हार्मोन चेक कराएं।
कब और कैसे जांच कराएं?
डॉक्टर से मिलने का सही समय तब है जब ब्लोटिंग 2 हफ्ते से ज्यादा चले या लाइफस्टाइल बदलने (जैसे फाइबर बढ़ाना, पानी पीना) से फर्क न पड़े। शुरुआती जांच में ब्लड टेस्ट (CBC, थायरॉयड), अल्ट्रासाउंड या स्टूल टेस्ट होते हैं। जरूरत पड़े तो एंडोस्कोपी या कोलोनोस्कोपी। SIBO के लिए ब्रेथ टेस्ट। समय पर जांच से 90% मामलों में जल्दी इलाज संभव है।
बचाव और सही कदम
बचाव सरल है: धीरे चबाकर खाएं, गैस वाले फूड्स (बीन्स, ब्रोकोली) कम करें, प्रोबायोटिक्स लें। व्यायाम और तनाव प्रबंधन IBS रोकते हैं। लेकिन खुद दवा न लें। डॉक्टर की सलाह से डाइट चेंज करें। याद रखें, शरीर के संकेत सुनना स्वास्थ्य का पहला नियम है।
















