
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा और रणनीतिक मोर्चे पर भारत को एक बड़ी कामयाबी मिली है, विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कुशल कूटनीति के चलते ईरान ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का फैसला किया है, अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील मार्ग से तिरंगा लगे जहाजों को बिना किसी बाधा के गुजरने की अनुमति मिल गई है।
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जयशंकर की ‘फोन डिप्लोमेसी’ ने दिखाया असर
पिछले कुछ दिनों से इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने ईरानी समकक्ष सैय्यद अब्बास अराघची के साथ लगातार संपर्क में थे, 28 फरवरी से लेकर 11 मार्च के बीच हुई कई दौर की उच्च स्तरीय बातचीत के बाद ईरान इस बात पर सहमत हुआ कि वह भारतीय टैंकरों और मालवाहक जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा।
भारतीय जहाजों की सुरक्षित घर वापसी
इस समझौते का असर भी दिखने लगा है, जानकारी के अनुसार, भारतीय तेल टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं, गौरतलब है कि ईरान ने यह छूट केवल भारतीय जहाजों को दी है, जबकि अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध और सख्ती बरकरार है।
क्यों अहम है यह समझौता?
भारत के लिए यह जीत आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है:
- ऊर्जा आपूर्ति: भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल और 90% एलपीजी इसी समुद्री रास्ते से आयात करता है।
- मानवीय पहल: भारत ने हाल ही में ईरानी नौसैनिक जहाज ‘IRIS लवान’ को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसे भारत के सद्भावपूर्ण कदम के रुप में देखा गया और इसी ने बातचीत की राह आसान की।
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चुनौतियां अभी बाकी
हालांकि तिरंगा लगे जहाजों को हरी झंडी मिल गई है, लेकिन अभी भी क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से करीब 28 भारतीय जहाज और उनका क्रू फंसा हुआ है, भारत सरकार और विदेश मंत्रालय इन जहाजों की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार ईरानी अधिकारियों के समन्वय में है।
















