
अगर आप किराए के मकान में रहते हैं और किसी कारणवश किराया देने में देरी हो गई है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, अक्सर देखा जाता है कि किराया लेट होने पर मकान मालिक किराएदार को तुरंत घर खाली करने की धमकी देने लगते हैं या जबरन बाहर निकालने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या कानूनन ऐसा करना संभव है? आइए जानते हैं क्या हैं किराएदारों के अधिकार और इस पर कोर्ट का सख्त रुख।
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तुरंत बेदखली संभव नहीं, कानून देता है सुरक्षा
भारतीय कानून के अनुसार, कोई भी मकान मालिक किसी किराएदार को रातों-रात या तुरंत घर से बाहर नहीं निकाल सकता, चाहे किराया देने में देरी ही क्यों न हुई हो इसके लिए एक तय कानूनी प्रक्रिया (Legal Process) का पालन करना अनिवार्य है।
बिजली-पानी काटना पड़ेगा भारी
अक्सर मकान मालिक किराया वसूलने के लिए किराएदार की बिजली या पानी का कनेक्शन काट देते हैं, कानूनी जानकारों के मुताबिक, ऐसा करना गैरकानूनी है, किराया न मिलने की स्थिति में भी मकान मालिक आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं कर सकता, अगर ऐसा होता है, तो किराएदार ‘रेंट कंट्रोल अथॉरिटी’ या पुलिस में इसकी शिकायत कर सकता है।
नोटिस देना है अनिवार्य प्रक्रिया
किसी भी किराएदार को निकालने से पहले मकान मालिक को एक लिखित लीगल नोटिस (Legal Notice) देना होता है।
- अवधि: आम तौर पर किराएदार को बकाया चुकाने या घर खाली करने के लिए 15 से 30 दिन का समय दिया जाना आवश्यक है।
- ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट: इस कानून की धारा 106 के तहत मासिक किरायेदारी खत्म करने के लिए कम से कम 15 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।
जबरन ताला लगाने पर हो सकती है जेल
यदि मकान मालिक किराएदार का सामान बाहर फेंकता है या घर पर ताला लगा देता है, तो इसे ‘क्रिमिनल ट्रेसपास’ माना जा सकता है, किराएदार ऐसी स्थिति में तुरंत पुलिस की मदद ले सकता है, मकान मालिक केवल कोर्ट की बेदखली डिक्री (Eviction Decree) मिलने के बाद ही पुलिस की मौजूदगी में कब्जा वापस ले सकता है।
क्या कहता है नया मॉडल टेनेंसी एक्ट?
केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट (Model Tenancy Act) के मुताबिक, यदि कोई किराएदार लगातार दो महीने तक किराया नहीं देता है, तो मकान मालिक को बेदखली की प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार मिलता है, हालांकि, इसमें भी सीधे दखल के बजाय रेंट ट्रिब्यूनल जाने का प्रावधान है।
कानून मकान मालिक और किराएदार दोनों के हितों की रक्षा करता है, किराएदारों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा एक वैध ‘रेंट एग्रीमेंट’ जरूर बनवाएं और विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें।
















