आजकल हर घर की बात गैस के बढ़ते दामों पर हो रही है। मिडिल ईस्ट के तनाव ने सिलेंडर की कीमतों को आसमान छूने पर मजबूर कर दिया है। एक 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर अब करीब 930 रुपये तक पहुंच चुका है। ऐसे में पाइप से आने वाली गैस यानी PNG कई परिवारों के लिए वरदान बन रही है। यह न सिर्फ सस्ती है बल्कि परेशानी भी कम करती है। आइए गणित समझते हैं कि महीने भर में आपकी जेब पर क्या असर पड़ता है।

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मासिक खपत का आसान हिसाब
एक सामान्य चार सदस्यों वाले परिवार को महीने में एक सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। अगर आपका खाना-पकाना मध्यम है तो कुल खर्च 900 से 950 रुपये के आसपास होता है। वहीं PNG में वही काम 25 से 30 घन मीटर गैस से हो जाता है। इसकी दर करीब 50 रुपये प्रति यूनिट है, लेकिन स्लैब सिस्टम से पहली कुछ यूनिटें 22-28 रुपये में मिल जाती हैं। नतीजा कुल बिल 850 से 1100 रुपये रह जाता है। मतलब हर महीने 150 से 300 रुपये की सीधी बचत। अगर परिवार बड़ा है और दो सिलेंडर लगते हैं तो PNG से 400 रुपये तक फायदा हो सकता है।
क्यों PNG ज्यादा फायदेमंद?
सिलेंडर में डिलीवरी का इंतजार, खत्म होने की टेंशन और कभी-कभी कालाबाजारी की मार अलग से। PNG तो बस मीटर पढ़ा और बिल आ गया। ऊर्जा के लिहाज से भी 1 किलो सिलेंडर गैस के बराबर 1.2 यूनिट PNG काम करती है, लेकिन लागत आधी रह जाती है। कम इस्तेमाल करने वाले घरों में तो PNG और सस्ती साबित होती है क्योंकि स्लैब रेट कम खपत पर ज्यादा फायदा देते हैं। ऊपर से कोई स्टोरेज की जरूरत नहीं, लीकेज का डर भी कम।
शुरुआती खर्च और लंबी बचत
PNG कनेक्शन के लिए 5 से 10 हजार रुपये लग सकते हैं, लेकिन 6-12 महीने में ही यह रिकवर हो जाता है। मेरठ जैसे शहर में IGL जैसी कंपनियां तेजी से कनेक्शन दे रही हैं। सिलेंडर पर सब्सिडी वाले लोगों को थोड़ा फायदा मिलता है, लेकिन बिना सब्सिडी वालों के लिए PNG ही सबसे स्मार्ट चॉइस है।
अंतिम सलाह
अगर आपका घर छोटा है या खपत कम है तो PNG से तुरंत स्विच करें। बड़ी फैमिली वाले भी साल भर में हजारों रुपये बचा लेंगे। सरकार भी PNG को बढ़ावा दे रही है, तो भविष्य में और राहत मिल सकती है। रसोई का बिल देखकर परेशान न हों, सही गणित से फैसला लें और जेब खुश रखें।
















